श्योपुर (मध्य प्रदेश)
हर साल 4 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों को बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ा। इस महत्वपूर्ण कदम ने भारत की महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को एक नई गति दी है और देश में चीतों के सफल पुनर्वास में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।
तीनों चीते अब करेंगे खुले जंगल में विचरण
जिन तीन चीतों को जंगल में छोड़ा गया, उनमें दक्षिण अफ्रीका की मादा चीता ‘वीरा’ और उसके 10 महीने के दो शावक शामिल हैं, जिनका जन्म इसी साल फरवरी में कूनो में हुआ था। ये शावक भारत में जन्मी चीतों की तीसरी पीढ़ी का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने इन तीनों चीतो को कूनो के परोंड वन क्षेत्र के पर्यटन क्षेत्र में मुक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चीता परियोजना की सफलता को “कोहिनूर” जैसा बताया और कहा कि मध्य प्रदेश अब सही मायने में ‘चीता स्टेट’ बन गया है।
‘प्रोजेक्ट चीता’ परियोजना की सफलता
इन तीन चीतों के खुले जंगल में छोड़े जाने के बाद, कूनो नेशनल पार्क के मुक्त वन क्षेत्र में घूमने वाले चीतों की कुल संख्या बढ़कर 19 हो गई है। कूनो में वर्तमान में कुल 29 चीते मौजूद हैं, जिनमें 8 वयस्क और 21 शावक शामिल हैं। इसके अलावा, तीन चीते गांधी सागर अभयारण्य में भी विचरण कर रहे हैं, जिससे मध्य प्रदेश में कुल चीतों की संख्या 32 हो गई है।

अंतर्राष्ट्रीय पहचान और पर्यटन को बढ़ावा
डॉ. यादव ने इस आयोजन को संबोधित करते हुए कहा कि चीतों का सफल पुनर्वास कूनो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीता परिवार की मौजूदगी से ईको-पर्यटन के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष 2026 का कैलेंडर और ‘फील्ड मैनुअल फॉर क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।
निरंतर निगरानी में रहेंगे तीनों चीते
वन अधिकारियों ने बताया कि छोड़े गए चीतों की सुरक्षा और परिदृश्य में सफल एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए उन्नत रेडियो-ट्रैकिंग और समर्पित फील्ड टीमों के माध्यम से पोस्ट-रिलीज़ निगरानी जारी रहेगी।
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