नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरावली पर्वत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 20 नवंबर को लिए गए अपने ही फैसले पर रोक लगा दिया है, और इसके साथ ही 21 जनवरी तक अरावली मे किसी भी प्रकार के खनन पर स्टे लगा दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा का लोगों ने गलत मतलब निकाल लिया है, जिसकी वजह से इस मामले में इतना विरोध बढ़ गया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है।
क्या है मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तब संगीन हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी थी, जिससे अरावली के अस्तित्व पर खतरा मंडराता नजर आ रहा था। जिसके बाद लोगों ने कोर्ट के इस फैसले पर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
अरावली की परिभाषा का निकाला गया गलत मतलब
यह पूरा मामला 20 नवंबर से शुरू हुआ, जब एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफ़ारिशों के बाद अरावली की एक नई परिभाषा को स्वीकार किया था। जिसके अनुसार जो पर्वत 100 मीटर से ऊँचे ज़मीन है उन्हें अरावली पहाड़ी का हिस्सा माना जाएगा और जो पहाड़ियाँ, जो 500 मीटर के दायरे के अंदर होंगी, उन्हें अरावली शृंखला का हिस्सा माना जाएगा।
इस फैसले के बाद लोगों ने जमकर इसपर विरोध किया। उनका कहना है कि अरावली की लगभग 90%-95% पहाड़ियां 100 मीटर से कम की है। नए फैसले के अनुसार उन्हें अरावली पर्वतमाला का हिस्सा नहीं माना जाएगा, जिससे उनपर कानूनी अधिकार नहीं रहेगा। इस वजह से उन पहाड़ियो पर अवैध खनन के मामले होने लगेंगे, जो अरावली और परिस्थितिकी तंत्र के लिए सही नहीं होगा।
अगली सुनवाई तक लगाई गई रोक
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई (21 जनवरी) तक अरावली में किसी भी तरह के खनन कार्य पर रोक लगा दिया है। अब इस मामले में में कोर्ट आगे क्या फैसला लेती है, वह अगली सुनवाई को ही पता चलेगा, जिसका सभी को इंतजार है।
एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का दिया निर्देश
पीठ ने अपनी सुनवाई में इस मामले की गंभीरता से जांच करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का दिया निर्देश है। साथ ही उन्होंने समिति को अरावली की एक सटीक परिभाषा देने का भी निर्देश दिया है। इस समिति को जल्द से जल्द गठित किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
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