गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
हाल ही में एनटीसीए ने एक आंकड़ा जारी किया, जिसमे साल 2025 में हुई कुल बाघों की मौतो में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई। डाटा के अनुसार साल 2025 में कुल 166 बाघों की मौत हुई है, जोकि पिछले साल से 40% अधिक है। ये आंकड़े न ही केवल चिंतनीय है, साथ ही ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ पर भी हजारों सवाल खड़ा कर रहे हैं।
साल 2025 में हुई कुल 166 बाघों की मौत
एनटीसीए द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में देश में कुल 166 बाघों की मौतें हुई है, जोकि एक दशक में सबसे अधिक है। इनमें से मध्य प्रदेश मे 55, महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 मौतें हुई हैं। ये मौतों ने केवल सरकार द्वारा चलाए गए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ पर सवाल खड़े कर रही है, साथ ही तमाम वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर भी सवाल उठा रही है।
‘टाइगर स्टेट’ में हुई सर्वाधिक मौतें
चीतों के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में जाना जाता है। साल 2025 में सबसे अधिक मौतें वही दर्ज की गई है। मिले आंकड़ो के अनुसार साल 2025 में मध्य प्रदेश में कुल 55 बाघों की मौत हुई है, जोकि वन विभाग और राज्य सरकार के लिए बेहद चिंता का विषय है। इतनी अधिक संख्या में हुई मौतों ने मध्य प्रदेश को मिले ‘टाइगर स्टेट’ के टैग पर धब्बा लगाने का काम किया है।
क्या है इन मौतों के पीछे का कारण?
इन मौतों के पीछे कई कारण शामिल हैं:-
- क्षेत्रीय संघर्ष- बाघों की बढ़ती आबादी ने उनकी बीच क्षेत्रीय संघर्ष के लिए प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से अपना संपूर्ण अधिक हासिल करने के लिए उनके बीच हिंसक टकराव होते हैं, जिसमें अक्सर बाघों की मौत हो जाती है।
- अवैध शिकार और अंग तस्करी – कुछ मामलों में अवैध शिकार और अंग तस्करों के भी वजह से इनकी जान चली जाती है।
- बीमारियां- कुछ मौतें प्राकृतिक कारणों और बीमारियों से भी हुई हैं।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष- कुछ घटनाओं में जंगल में भोजन-पानी की कमी से बाघ उसकी तलाश में मानव बस्तियों में आ जाते हैं, जिससे अक्सर इंसानों से उनका टकराव हो जाता है, और कभी-कभार बाघों के हमलों से बचने के लिए इंसान उन्हें मार देते है।
मृत्यु दर को कम करना है जरूरी
जिस तरह से बाघों की मौत की मृत्यु दर बढ़ रही हैं, अगर यह इसी तरह जारी रहा तो देश में बाघों के लिए संकट पैदा हो सकता है। ये आंकड़े वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर हजारों सवाल खड़ा कर रहे है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में बाघ सिर्फ इतिहास के पन्नों तक ही सीमित रह जाएंगे। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को जल्द से जल्द इसपर कदम उठाना चाहिए।
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