श्योपुर (मध्य प्रदेश)
भारत के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को एक बड़ा झटका लगा है। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में खुले जंगल में छोड़े गए दो शावकों में से एक शावक शुक्रवार दोपहर मृत पाया गया। यह दुखद घटना अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के एक दिन बाद हुई, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं मादा चीता ‘वीरा’ और उसके दोनों शावकों को बाड़े से जंगल में छोड़ा था। इस अप्रत्याशित मौत से वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
एक दिन पहले ही जंगल में छोड़ा गया था
बीते 4 दिसंबर 2025 को कूनो के परोंद वन क्षेत्र मे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मादा चीता ‘वीरा’ और उसके 10 महीने के दो शावकों को बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ा गया था। यह कदम चीता परियोजना में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा था, क्योंकि इन शावकों का जन्म भारत में ही हुआ था। हालांकि, जंगल में छोड़े जाने की रात ही एक शावक अपनी मां और दूसरे भाई-बहन से अलग हो गया।
शुक्रवार दोपहर को नियमित निगरानी के दौरान वन कर्मचारियों को शावक का शव मिला। मृत शावक करीब 10 महीने का था। शावक का रेडियो कॉलर सिग्नल गुरुवार रात को अंधेरा होने के बाद बंद हो गया था। जब शुक्रवार को टेलीमेट्री टीम ने दोबारा सिग्नल पकड़ा, तब तक शावक की मौत हो चुकी थी। शव पर फिलहाल कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं, लेकिन मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
ऐसी घटनाओं से ‘प्रोजेक्ट चीता’ को लग रहा है बड़ा झटका
इस घटना ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ को लगा एक बड़ा झटका दिया है, जिसने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की चुनौतियों को फिर से उजागर कर दिया है। भारत में चीतों को विलुप्त हुए 70 साल बाद वापस लाया गया था। सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 वयस्क चीते कूनो लाए गए थे। तब से लेकर अब तक कई चीते अपनी जान गंवा चुके हैं।
इससे पहले भी भारत में जन्मे शावकों की मौतें हुई हैं। मई 2023 में ज्वाला नामक चीता के तीन शावकों की मौत अत्यधिक गर्मी और कुपोषण के कारण हुई थी। एक शावक ‘मुखी’ को अधिकारियों ने विशेष देखभाल से बचाया था, जिसने हाल ही में खुद पांच शावकों को जन्म दिया है।वहीं सितंबर 2025 में एक अन्य 20 महीने के शावक की मौत तेंदुए के हमले में हुई थी।
अब तक हो चुकी है 19 चीतो की मौत
एक आंकड़े के अनुसार, परियोजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 19 चीते मर चुके हैं। इस घटना के बाद, कूनो नेशनल पार्क में अब कुल 27 चीते बचे हैं, जिनमें 8 वयस्क और 19 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। हालांकि, बार-बार हो रही मौतें परियोजना की सफलता पर सवालिया निशान लगाती हैं और प्रबंधन की चुनौतियों को बढ़ाती हैं।
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