आस्था का अंधविश्वास ले रहा नीलकंठों की जान!

तेलंगाना का राजकीय पक्षी इंडियन रोलर (नीलकंठ/पलापिट्टा), यू तो अपने अनुपम रूप के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि इन्हे दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों पर देखना शुभ होता हैं। इसी आस्था के अंधविश्वास का शिकार यह पक्षी आज विलुप्त होने की कगार पर आ गया हैं। लोगो के इन्ही मान्यताओं के चक्कर मे त्योहारों के दौरान शिकारियों द्वारा इन्हे अवैध रूप से बंदी बना लिया जाता है, और अक्सर गंभीर तनाव और चोट के कारण इनकी मृत्यु हो जाती हैं जो इनके विलुप्त होने का मुख्य कारण बनती जा रही हैं।

त्योहारों पर देखना माना जाता है शुभ

इंडियन रोलर (नीलकंठ/पलापिट्टा) को त्योहारों पर देखना बेहद शुभ माना जाता है खासकर दशहरे पर। ऐसी मान्यता है कि रावण का वध करने से पहले भगवान श्री राम ने नीलकंठ का दर्शन किया था, जो उनके लिए शुभ साबित हुआ था। यह भी माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति नीलकंठ के दर्शन करके कोई मनोकामना मागता है, तो नीलकंठ उसकी मनोकामना भगवान शिव तक पहुंचाता है और वह मनोकामना अवश्य पूरी होती हैं।

यह भी माना जाता कि त्योहार के दौरान इस पक्षी को देखने वाले अपने पापों से मुक्त हो जाते हैं। इस पक्षी से जुड़ा एक अन्य अंधविश्वास यह है कि इसके कटे हुए पंखों को घास में मिलाकर गायों को खिलाने से उनकी दूध देने की क्षमता बढ़ जाती है। इन्ही मान्यताओं के कारण त्योहारों के महीनें भर पहले से ही शिकारी इनको अवैध रूप से पकड़कर पिजड़ों मे बंद कर लेते है जिससे त्योहार के दिन लोगों को इनका दर्शन करवा के पैसे कमा सके।

अपने अनुपम रूप के लिए प्रसिद्ध है नीलकंठ

नीलकंठ 26-27 सेंटीमीटर का एक सुंदर पक्षी होता हैं, यह अपने सुंदर रंग-बिरंगे पंख और अपने नीले गले (नीलकंठ) के लिए प्रसिद्ध होता है। इसके पंख चमकीले नीले, हरे और बैंगनी रंगों का मिश्रण से बने होते है, जो खासकर उड़ते समय बहुत ही आकर्षित दिखाई देते हैं। किसान इन्हे अपने खेतों के लिए शुभ मानते हैं, क्योंकि वे फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को खाते हैं।

इन्हे भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है क्योंकि भगवान शिव को भी नीलकंठ कहा जाता है और दशहरा और दुर्गा पूजा के दौरान इन्हे देखना बेहद शुभ माना जाता है, जो सुख और सौभाग्य में वृद्धि का प्रतीक है।

अंधविश्वास का मार झेल रहा यह पक्षी

नीलकंठ हर साल त्योहारों के समय लोगो के अंधविश्वास की मार झेलता हैं। शिकारी इसे पकड़कर पिंजडे में बंद कर देते, इनके पंख काटना देते, रस्सी से बाँध देते और यहाँ तक उन्हे उड़ने से रोकने के लिए उनकी पंख मे गोंद लगा देते। अक्सर इन प्रताड़नाओं की वजह से गंभीर तनाव या चोट की वजह से इनकी मृत्यु हो जाती है। हर साल स्वयसेवक द्वारा कई नीलकंठों को त्योहारों के समय शिकारियों के अवैध चंगुल से छुड़ाकर आजाद किया जाता हैं।

विलुप्त होने की कगार पर है नीलकंठ

लंबे समय से चली आ रही यह मान्यताएं नीलकंठ के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है, जिसकी वजह से देश में इसकी आबादी में तेज़ी से गिरावट आ रही है। भारत के पक्षियों की स्थिति 2023 की रिपोर्ट में पाया गया कि भारतीय रोलर की आबादी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है।

हैदराबाद बर्ड एटलस ने सर्वेक्षण की गई 195 प्रजातियों के 70,000 से अधिक पक्षियों में से फरवरी 2025 में केवल 26 और अगस्त 2025 में केवल चार देखे जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया, जो शहर में चिंताजनक रूप से कम संख्या का संकेत देता है। अगर इस तरह की गतिविधियाँ अनियंत्रित रूप से जारी रहीं, तो यह प्रजाति जल्द ही विलुप्त हो जाएगी।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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