एआई की मदद से जंगल मे बनाया बब्बर शेर, वन विभाग परेशान

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक बड़ी ही अजीबोगरीब घटना सामने आई है। जब देवा के जंगल मे एक बब्बर शेर की तस्वीर ने स्थानीय लोगों और वन विभाग के बीच हड़कंप मचा दिया। हालांकि, घटना कुछ ही घंटों में सुलझ गई जब पता चला कि वायरल हो रही तस्वीर असली नहीं, बल्कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक से बनाई गई एक फर्जी तस्वीर थी।

तेजी से वायरल हो रही थी शेर की तस्वीर

यह घटना शनिवार की बताई जा रही है, जब अचानक से बाराबंकी की देवा रेंज के अंतर्गत आने वाले शाहपुर गांव के निवासियों के व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक बब्बर शेर की तस्वीर तेजी से वायरल होने लगी। तस्वीर में अफ्रीकी नस्ल का एक शेर देवा के जंगल में घूमता हुआ दिखाई दे रहा था।

इस तस्वीर के साथ यह खबर भी फैलाई गई कि जंगल में एक बब्बर शेर देखा गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत और अफरातफरी मच गई। जंगल के पास रहने वाले लोगों ने डर के मारे घरों से निकलना बंद कर दिया और स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी।

वन विभाग की कार्रवाई

सूचना मिलते ही, देवा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी मयंक सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की एक टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने पूरे शाहपुर वन बीट क्षेत्र की गहनता से जांच की। कई घंटों की तलाशी और जांच के दौरान, अधिकारियों को न तो कोई शेर मिला और न ही उसके पंजों के निशान।जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि तस्वीर फर्जी थी और जंगल में किसी शेर की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं था।

युवक ने एआई की मदद से बनाई थी तस्वीर

वन विभाग ने साइबर सेल की मदद से उस स्रोत का पता लगाया जहां से तस्वीर पहली बार वायरल हुई थी। पता चला कि यह तस्वीर शाहपुर गांव के ही स्नातक के एक छात्र ने बनाई थी।

पूछताछ के बाद युवक ने स्वीकार किया कि उसने एआई तकनीक का उपयोग करके शेर की एक तस्वीर बनाई और उसे स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा कर दिया। उसे अंदाजा नहीं था कि इससे इतना बड़ा हड़कंप मच जाएगा। वन अधिकारियों ने युवक को हिरासत में ले लिया और बाद में कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे सख्त हिदायत दी गई।

कोई भी वायरल फोटो और खबर पर मत करे भरोशा

इस पूरी घटना ने सोशल मीडिया के दौर में एआई-जनित फर्जी खबरों के खतरे को उजागर किया है। वन विभाग और स्थानीय पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसी किसी भी खबर या तस्वीर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और उन्हें आगे साझा न करें। और आगे से इस तरह की किसी घटना पर तुरंत स्थानीय वन विभाग या पुलिस को दें ताकि समय पर सही कार्रवाई हो सके।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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