कर्नाटक के पश्चिमी घाट में फल-फूल रहे है सबसे अधिक स्वस्थ हाथी

कर्नाटक

हाल ही में जारी एक डीएनए-आधारित सर्वेक्षण के रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के भारत के पश्चिमी घाट में सबसे स्वस्थ और तंदुरुस्त हाथी पाए जाते है। इस रिपोर्ट को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें कर्नाटक को 6,013 हाथियों के साथ भारत में सबसे अधिक हाथी आबादी वाले राज्य के रूप में दिखाया गया है। यह आंकड़ा देश की कुल हाथी आबादी में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

पहली बार डीएनए के आधार पर किया गया सर्वेक्षण

ऐसा पहली हुआ है कि हाथी की जनगणना करने के लिए डीएनए-आधारित सर्वेक्षण किया गया, जिसमे हमेशा की तरह पारंपरिक तरीकों से गणना करने के बजाय हाथियों के गोबर के नमूने एकत्र करके सर्वेक्षण किया गया। इसकी मदद से हाथियों की संख्या को और भी सटीक तरीके से आंका जा सका। विधि से न केवल हाथियो की जनसंख्या का आकड़ा निकाला जा सका, इसके साथ ही अलग-अलग हाथियों की पहचान भी संभव हो पाया और उनके आनुवंशिक स्वास्थ्य और आपसी संबंध का भी पता लगाया जा सका।

पश्चिमी घाट मे निवास करते है सबसे स्वस्थ हाथी

अपनी घनी हरियाली और समृद्ध जैव विविधता के लिए मशहूर भारत का पश्चिमी घाट, भारत की कुल हाथी आबादी के आधे हिस्से का घर है। यहा मुख्य रूप से एशियाई हाथी निवास करते है। नवीनतम डीएनए सर्वेक्षण के अनुसार भारत में कुल 22,446 हाथी है। और इसमे से पश्चिमी घाट क्षेत्र (कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु) मे 11,934 हाथी हैं, जो भारत की कुल हाथी आबादी का लगभग आधा है। पश्चिमी घाट के कुल हाथियों में से अकेले कर्नाटक में 6,013 हाथियों है, जो इसे भारत का “हाथी राज्य” बनाती है।

इस क्षेत्र में हाथियों की स्वस्थ आबादी का होना दर्शाता है कि कर्नाटक में चलाए जा रहे संरक्षण कार्यक्रम कितने प्रभावी हैं। इनकी यह स्वस्थ आबादी विविध और समृद्ध पर्यावासों का परिणाम है, जो घने पश्चिमी घाट के जंगलों से लेकर दक्कन के पठारी क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।

भविष्य मे संरक्षण है जरूरी

कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्वस्थ हाथी आबादी की स्थिरता एक बड़ी सफलता है, जो राज्य के प्रभावी संरक्षण प्रयासों को दर्शाती है। हालांकि, यह उपलब्धि हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होने देती, क्योंकि भविष्य में कई चुनौतियाँ सामने हैं। मानव-हाथी संघर्ष को कम करना, आवास के विखंडन को रोकना और वैज्ञानिक आधार पर संरक्षण रणनीतियों को लागू करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह न केवल हाथियों के अस्तित्व के लिए, बल्कि पश्चिमी घाट के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी आवश्यक है। यह रिपोर्ट एक नई शुरुआत है, जो हमें मात्रा से हटकर गुणवत्ता और दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करती है।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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