कर्नाटक: बंडीपुर–नागरहोल में सफारी पर विशेषज्ञ समिति का गठन, चरणबद्ध बहाली का फैसला

टाइगर रिज़र्व वन्यजीवों पर सफारी वाहनों से पड़ने वाले प्रभाव पर जाँच करेगी समिति

प्रशांत मेश्राम, भोपाल

कर्नाटक राज्य वन्यजीव बोर्ड ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई 20वीं बैठक में यह निर्णय लिया कि बंडीपुर और नागरहोल टाइगर रिज़र्व में सफारी वाहनों से होने वाली गतिविधियों का वन्यजीवों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। समिति यह भी आकलन करेगी कि इन सफारियों की कैरीइंग कैपेसिटी (वहन क्षमता) कितनी है और क्या इन्हीं कारणों से वन्यजीव जंगलों से निकलकर मानव बस्तियों की ओर आ रहे हैं।

यह मुद्दा वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने अध्यक्ष की अनुमति से उठाया। मंत्री ने बताया कि अक्टूबर–नवंबर में हुई बाघों की लगातार घटनाओं के बाद—जिनमें तीन लोगों की मौत और एक व्यक्ति स्थायी रूप से विकलांग हुआ—बंडीपुर और नागरहोल में सफारी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई थीं। उन्होंने कहा कि दो महीनों के निलंबन के दौरान जंगल से बाहर बाघ हमलों की कोई घटना नहीं हुई

मंत्री ने बाघों की बढ़ती संख्या पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि 1972 में बंडीपुर में केवल 12 बाघ थे, जबकि वर्तमान में उनकी संख्या लगभग 175 से 200 आंकी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ को स्वतंत्र रूप से रहने के लिए लगभग 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चाहिए। ऐसे में करीब 900 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र में टिकाऊ क्षमता से लगभग दोगुनी संख्या होने के कारण आवास पर दबाव भी बाघों के जंगल से बाहर निकलने का एक बड़ा कारण हो सकता है।

वन एवं वन्यजीव एंबेसडर अनिल कुंबले ने कहा कि सफारी संचालन और वन्यजीवों की आवाजाही के बीच सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि सफारी गतिविधियाँ कुल वन क्षेत्र के 8 प्रतिशत से भी कम हिस्से में होती हैं और इससे स्थानीय समुदायों की आजीविका जुड़ी है। इसलिए इस पहलू को ध्यान में रखकर निर्णय की समीक्षा होनी चाहिए।
वहीं गुंडलुपेट विधायक गणेश प्रसाद ने कहा कि सफारी निलंबन से स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हुई और पर्यटन को झटका लगा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक पी.सी. रे ने सफारी को चरणबद्ध तरीके से पुनः शुरू करने का सुझाव दिया।

सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बंडीपुर और नागरहोल में सफारी को चरणबद्ध रूप से बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने एक विशेषज्ञ समिति गठित कर सफारी की वहन क्षमता और विशेषकर बाघों के मानव बस्तियों में आने के कारणों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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