काजीरंगा (असम)
असम में स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यू तो अपने प्रसिद्ध एक-सींग वाले गैंडों और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले दो सालों से पर्यटकों के लिए यहाँ की हाथी सफारी भी एक प्रमुख आकर्षण बन कर सामने आयी है। मॉनसून के मौसम में बंदी के बाद 1 नवंबर से एक बार फिर यहा हाथी सफारी को पर्यटकों के खोल दिया गया है, जिससे उद्यान मे आने वाले आगंतुक रोमांचक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
मॉनसून के दौरान बंद रहता है उद्यान
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान आमतौर पर मानसून के दौरान बंद रहता है। तीन महीने बंद रहने के बाद अक्टूबर में फिर से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। इस वर्ष 26 सितंबर को इसे जीप सफारी के लिए खोल दिया गया, वही 1 नवंबर 2025 को इसे हाथी सफारी के लिए भी खोल दिया गया। सफारी शुरू होने से पहले महावतों द्वारा पारंपरिक ‘हाथी पूजा’ की जाती है, जिसके बाद हाथी सफारी का शुभारंभ होता है।
हाथी सफारी देती है पर्यटकों को रोमांचक अनुभव
हाथी सफारी का अनुभव अद्वितीय होता है, क्योंकि यह पर्यटकों को एक-सींग वाले गैंडों, हाथियों, दलदली हिरणों और जंगली भैंसों जैसे वन्यजीवों को बहुत करीब से देखने का अवसर प्रदान करती है। हाथी पर बैठकर भोर के समय उगते सूरज को देखना और कोहरे के बीच गैंडों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय पल होता है। मार्च 2024 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काजीरंगा का दौरा किया था और हाथी व जीप सफारी का आनंद लिया था, जिससे इस स्थान की लोकप्रियता और बढ़ी थी।
क्या है सफारी की टाइमिंग और चार्ज
हाथी सफारी आमतौर पर सुबह के सत्रों में आयोजित की जाती है, जो दो मुख्य समूहों में बंटी होती है-
●पहला सत्र: सुबह 5:15 से 6:15 तक।
●दूसरा सत्र: सुबह 6:15 से 7:15 तक।
पर्यटन सत्र के साथ ही सफारी की दरों में भी संशोधन किया गया है-
●भारतीय पर्यटकों के लिए: ₹1,200 प्रति सीट (कुल शुल्क लगभग ₹1,350 जिसमें प्रवेश और कल्याण शुल्क शामिल है)।
●विदेशी पर्यटकों के लिए: ₹2,000 प्रति सीट (कुल शुल्क लगभग ₹2,700 जिसमें अतिरिक्त शुल्क शामिल है)।
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