कोडागु में नही थम रहा हैं हाथियों का कहर

कोडागु (कर्नाटक)

कर्नाटक के कोडागु जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में जंगली हाथियों का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, जो स्थानीय लोगों, विशेषकर किसानों और वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन चुका है। क्षेत्र मे लगातार हो रहे इस मानव-हाथी संघर्ष ने विकराल रूप ले लिया है, जहां आए दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है। हाल के महीनों में हाथियों के हमलों में कई लोगों की मौतें हुई हैं और फसलों को भारी क्षति पहुंची है।

जान-माल का हो रहा है भारी नुकसान

कोडागु और उसके आसपास के क्षेत्रों मे काफी समय से हाथियों ने अपना डेरा जमा रखा है। इनके कहर से जान-माल का खतरा बना रहता है, खासकर किसान इससे काफी परेशान और आक्रोश मे है। बीते अगस्त में, कोडागु के विभिन्न क्षेत्रों में 30 से अधिक हाथियों का झुंड देखा गया, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई।

जुलाई और अगस्त में हाथी के हमलों में लोगों के घायल होने और मारे जाने की खबरें आई हैं। मई में भी एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जब वन कर्मचारी शव को हटाने की कोशिश कर रहे थे, उस समय भी हाथी ने हमला करने का प्रयास किया था। अप्रैल में एक किसान की मौत हाथी के हमले में हुई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने जानवर को पकड़ने की मांग की थी। जनवरी में, एक जंगली हाथी भोजन की तलाश में एक कांग्रेस नेता के घर के बरामदे में घुस गया, जिसका वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गया।

वही सितंबर में नेपोकलू के पास पेरूर गांव में हाथियों के झुंड ने कॉफी, केला, नारियल और सुपारी के बागानों पर हमला कर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। जिसके बाद किसानों ने सरकार और वन विभाग से मुआवजे और ठोस कार्रवाई की मांग किया। इस समस्या का समाधान करने के लिए वन विभाग ने कई प्रयास किए पर हमेशा असफलता ही उनके हाथ लगी। एक बार तो हाथियो को पकड़कर दूर जंगल मे छोड़ा गया था, पर अगले दिन दोबारा हाथी वापस आ गए।

क्या है इसका मुख्य कारण

क्षेत्र मे चल रहे इस मानव-हाथी संघर्ष का मुख्य कारण उनके आवास का नुकसान है, जिससे हाथी भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों में घुसने के लिए मजबूर हो गए हैं। वन क्षेत्रों मे लगातार हो रही कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। हाथी अक्सर मानव बस्तियो को अपना गलियारा मानते हुए चले आते हैं, जिससे वे मनुष्यों के सीधे संपर्क में आ जाते हैं।

वन विभाग के लिए है चुनौतीपूर्ण काम

वन विभाग हाथियों के उत्पात को रोकने के लिए कई उपाय कर रहा है, जिसमें बिजली की बाड़ लगाना, खाइयां खोदना और गश्त बढ़ाना शामिल है। हालांकि, ये उपाय हमेशा प्रभावी नहीं होते। कभी-कभी हाथियों को पकड़ने या स्थानांतरित करने के अभियान चलाए जाते हैं। फरवरी 2023 में, वन विभाग ने 150 से अधिक कर्मचारियों और पांच हाथियों की मदद से एक आदमखोर बाघ को पकड़ा था, जो हाथियों के साथ सहयोग का एक उदाहरण था, लेकिन हाथियों के प्रबंधन में सफलता अभी भी सीमित है।

समस्या का समाधान है जरूरी

इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए वन विभाग, स्थानीय समुदाय और प्रशासन को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास के गांवों में जागरूकता फैलाना, हाथियों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी दीर्घकालिक रणनीतियां बनाना महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और फसलों के नुकसान का समय पर मुआवजा देना आवश्यक है ताकि मानव-हाथी सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सके।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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