गुजरात के एशियाई शेर समुद्री तटों को बना रहे है अपना नया ठिकाना

गुजरात

अब वो दिन दूर नही जब आप गुजरात में एशियाटिक शेरों का दीदार गीर के जंगल मे ही नही, बल्कि समुद्री तटों पर भी कर सकेंगे। बीते कुछ वक्त से गुजरात में एशियाई शेर सौराष्ट्र क्षेत्र के मैंग्रोव और तटीय इलाकों में देखे जा रहे हैं, जिससे उनके नए ठिकानों का पता चल रहा है और यह उनकी बढ़ती आबादी का सकारात्मक संकेत दे रही हैं। सिर्फ 1-2 नहीं बल्कि 134 शेर टहलते देखे जा रहे है गुजरात के मैंग्रोव और समुद्र तटो पर।

पिछलें कुछ दिनों से गुजरात के समुद्री तटों पर एशियाई शेरों के घूमने की लगातार खबरें और तस्वीरें सामने आ रही हैं। शोधकर्ताएं इस घटना पर अध्ययन कर रहे हैं। हाल के अध्ययनों और रिपोर्टों से पता चला है कि गिर क्षेत्र के कई शेर अब तटीय इलाकों बसने लगे हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि यह दुनिया में पहली बार ऐसा है कि एशियाई शेर मैंग्रोव में बसे हैं।

मैंग्रोव को बना रहे अपना नया घर

मैंग्रोव समुद्र के किनारे कम गहराई वाले और ज्वारीय क्षेत्रों में उगे जंगल होते हैं, जों कई वन्यजीवों का ठिकाना होता है इस वजह से शेरों के लिए समुद्री तटों पर उनके शिकार के लिए पर्याप्त विकल्प होता हैं। इसके अलावा यहां का तापमान भी उनके लिए अनुकूल है। समुद्री तट से आने वाली हवाओं के चलते उन्हें गर्मी से राहत भी मिलती हैं। गिर की तुलना में यहां का माहौल और पर्यावरण ज्यादा अनुकूल है जिससे आने वाले समय में गुजरात के 300 किलोमीटर समुद्र तटों पर शेरों की संख्या और बढ़ेगी। इसके अलावा यहां प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा (गांडो बवाल) नाम की घास होती है, जो शेरों के लिए बढ़िया आवास साबित हो रही है।

गुजरात में पहली बार 1995 में समुद्र किनारे शेर को देखा गया था। 2020 मे यह संख्या 100 तक पहुंच गई और अब हालिया खबरों के मुताबिक 2025 मे अभी तक 134 शेरों को गुजरात के मैंग्रोव और समुद्री इलाकों मे देखा गया हैं।

पारंपरिक आवास मे कमी हैं एक मुख्य कारण

मैंग्रोव और तटीय क्षेत्रों मे शेरों का बसना उनके पारंपरिक आवास के सिकुड़ने का एक संकेत हैं। लगातार बढ़ रही आबादी के कारण जंगल मे उन्हे एक-दूसरे से संघर्ष का सामना करना पड़ता है जिसमे कभी-कभार तो उनकी मौत भी हो जाती है। एक अध्ययन से पता चला है कि जहां गिर में शेरों के घरों की औसत रेंज 33.8 वर्ग किलोमीटर है, वहीं समुद्र किनारे रहने वाले शेर औसतन 171.8 वर्ग किलोमीटर में रह रहे हैं। यही वजह है कि खुद को खत्म होने से बचाने के लिए उनका मैंग्रोव में बसना है या नई जगह की तलाश करना आम बात हैं।

लगातार बढ़ रही है उनकी संख्या

गुजरात मे एशियाई शेरों की आबादी में निरंतर वृद्धि देखी जा रही हैं। हाल ही मिले आकड़ों से पता चलता है कि जो 2020 में शेरों की संख्या 674 थी वह 2025 में बढ़कर 891 हो गई, जो शेरों की आबादी मे एक बड़ी वृद्धि है। शेरों की आबादी बढ़ने के साथ ही उनका विचरण क्षेत्र भी बढ़ गया है, जिसकी वजह से गिर के जंगलों में उन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है, इसलिए वे नए ठिकानों की तलाश मे गुजरात के मैंग्रोव और समुद्री तटों पर बसने लगे हैं।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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