सागर (मध्य प्रदेश)
जल्द ही चीतो को उनका नया और तीसरा घर मिलने वाला है। मध्य प्रदेश का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे ‘नौरादेही अभयारण्य’ के नाम से भी जाना जाता है। हाल ही में इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा चीतों के नए घर के रूप में मंजूरी मिल गई है वहीं राज्य मंत्रीमंडल द्वारा इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया है। इस फैसले से बुंदेलखंड क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे।
चीतों को मिलेगा उनका नया बसेरा
अबतक देश में चीतों के दो घर थे- कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभ्यारण्य, जिसमे जल्द ही ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ का भी नाम जुड़ने वाला है। इस फैसले से सरकार द्वारा चीतों के पुनरुद्धार के लिए चलाए जाने वाले महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ परियोजना को मदद मिलेगी। ‘प्रोजेक्ट चीता’ देश में विलुप्त हो चुकी चीतों के अस्तित्व को फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, जोकि काफी हद तक सफल भी साबित हुआ है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से जुड़ी कुछ खास बातें
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। लगभग 550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह टाइगर रिजर्व अपने हरित वातावरण और समृद्ध जैव विविधता के लिए देश में प्रसिद्ध है। वन्यजीव विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीमों ने निरीक्षण में इस क्षेत्र को चीतों के प्राकृतिक निवास के रूप में उपयुक्त पाया, जिसके बाद एनटीसीए ने इसे चीतों का नया और देश में चीतों का तीसरा घर के रूप में मंजूरी दे दिया।
किए जा रहे हैं ये विभिन्न कार्य
चीतों के नए घर के रूप में अधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद, इसे चीतों के लिए प्राकृतिक निवास के अनुरूप बनाने की विभिन्न तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही है। चीतों के रहने के लिए बाड़े लगभग बनकर तैयार हो चुके हैं, वही लगभग 20 किलोमीटर बन रही लंबी फेंसिंग का काम भी प्रगति पर है।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को अगले साल मानसून से पहले या जुलाई 2026 तक लाने की उम्मीद है। इसके साथ ही चीतों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराने के लिए यहां गौर, हिरण और अन्य वन्यजीवों को भी लाने की योजना बनाई गई है, जिससे उन्हें प्राकृतिक आवास का अनुभव मिल सके।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
वर्तमान में यहां में बाघ, तेंदुएं सहित कई अन्य वन्यजीवों निवास करते हैं। चीतों के आ जाने के बाद यह देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बन जाएगा जहां कैट फैमिली के तीनों मुख्य सदस्य – बाघ, तेंदुआ और चीते एक जगह पर एक साथ देखे जा सकेंगे। इस उपलब्धि से बड़े स्तर पर पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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