ज़ीरो (अरुणाचल प्रदेश)
आज अरुणाचल प्रदेश के ज़ीरो बटरफ्लाई पार्क, सिखे झील में ‘ज़ीरो बटरफ्लाई मीट’ (ZBM) के 12वें संस्करण का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुबनसिरी जिले की उपायुक्त श्रीमती ओली परमे रही, साथ मे पीसीसीएफ-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन न्गिलयांग टैम, टिलिंग टेकर (डीएफओ, हापोली), पुरा साम्यबो (अध्यक्ष, टीएसडी), डॉ. तासो कम्पू सुबू (अध्यक्ष, एडब्ल्यूएजेड) और नानी हन्या (अध्यक्ष, अपतानी जीबी एसोसिएशन) सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
ज़ीरो बटरफ्लाई मीट को न्गुनुज़ीरो और वन एवं पर्यावरण विभाग, और हापोली वन प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता हैं। वर्षों से, यह मीट जैव विविधता जागरूकता और मानव-प्रकृति सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता हैं। 12वें ज़ीरो बटरफ्लाई मीट के क्षेत्रीय सत्र 6 से 8 अक्टूबर तक पंगे, टेल वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित किए जाएँगे, जहाँ प्रतिभागी तितली आवासों का पता लगाएँगे और क्षेत्रीय दस्तावेज़ीकरण, प्रकृति पथों और संरक्षण जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
“बटरफ्लाइज़ ऑफ़ ज़ीरो” पुस्तक के दूसरे संस्करण का किया गया विमोचन
इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण “बटरफ्लाइज़ ऑफ़ ज़ीरो” पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन था – जिसमें 242 प्रलेखित तितली प्रजातियाँ शामिल हैं, जबकि पहले संस्करण में 186 प्रजातियाँ थीं। इस पुस्तक में ज़ेडबीएम के पिछले संस्करणों में एकत्रित आश्चर्यजनक दृश्य और आँकड़े संकलित हैं, जो ज़ीरो की समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय शोधकर्ताओं और उत्साही लोगों के योगदान को दर्शाते हैं।

किसी परियोजना को चुनौतियों के बावजूद साल-दर-साल जारी रखना ही है असली उपलब्धि- ओली परमे
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ओली परमे ने अपने भाषण मे न्गुनुज़ीरो के पिछ्ले बारह वर्षों में निरंतर प्रयासों की सराहना की और कहा कि “किसी परियोजना को शुरू करना आसान है, लेकिन चुनौतियों के बावजूद उसे साल-दर-साल जारी रखना ही असली उपलब्धि है।” उन्होंने हापोली वन प्रभाग द्वारा ज़ीरो को ‘चेरी वैली’ में बदलने की पहल की सराहना की और उसे पूर्ण प्रशासनिक समर्थन का आश्वासन दिया और संरक्षण अभियानों में समुदाय की मज़बूत भागीदारी का आग्रह किया।
बटरफ्लाई मीट समाज के सभी वर्गों के लिए है लाभकारी- केनी बागरा
पुलिस अधीक्षक केनी बागरा ने इस आयोजन की समावेशी प्रकृति पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़ीरो बटरफ्लाई मीट समाज के सभी वर्गों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि “मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने में आयोजकों के साथ मिलकर काम करना सभी के लिए ज़रूरी है।”मुख्य वन्यजीव वार्डन न्गिलयांग टैम ने मानव और वन्यजीवों के बीच गहरी परस्पर निर्भरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जंगली शिकार की कमी के कारण जंगली कुत्तों द्वारा मिथुन पर हमला करने और आवास विनाश से मधुमक्खियों और तितलियों पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे उदाहरण दिए—परागण में कमी और कुछ क्षेत्रों में संतरे जैसे फलों की पैदावार पर असर।
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