हजारीबाग (झारखंड)
अब घर मे तोता-मैना पाला तो खैर नही। पकड़े जाने पर जुर्माना तो भरना ही होगा साथ मे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यह कड़ी चेतावनी दी गई है झारखंड के हजारीबाग वन विभाग द्वारा।
उन्होने चेताया है कि तोता और मैना जैसी भारतीय मूल की पक्षी प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है, इनको घर मे रखना, पिंजरे में कैद करना गैरकानूनी है और ऐसा करने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है जिसमें जेल और भारी जुर्माना शामिल है।
इनको पकड़ना और कैद करना है अपराध
हजारीबाग के पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ विकास कुमार उज्ज्वल ने बताया कि कई वन्यजीवों को वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत संरक्षित किया गया है। लोग अनजाने में या शौक के तौर पर इन पक्षियों को पालते हैं, लेकिन कानूनन ये जंगली जानवर माने जाते हैं और इन्हें कैद करना अपराध है।
वन विभाग के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के घर में तोता, मैना या अन्य संरक्षित पक्षी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी पक्षी को घर में कैद न करें।
सजा का प्रावधान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत, इन पक्षियों को पालने या अवैध व्यापार में शामिल होने पर न्यूनतम तीन साल से लेकर अधिकतम सात साल तक की जेल हो सकती है, साथ ही 10,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
इन पक्षियों को पालना है अपराध
भारत में कई पक्षी प्रजातियाँ संरक्षित हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
●इंडियन रिंगनेक तोता
●एलेक्ज़ेंडरिन तोता
●सामान्य मैना
●मोर
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इन पक्षियों को न तो खरीदें, न पालें और न ही इन्हें कैद करें। पक्षी मुक्त वातावरण के लिए बने हैं। विभाग ने लोगों से ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी निकटतम वन कार्यालय या पशु संरक्षण समूह को देने का आग्रह किया है।
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