दिल्ली चिड़ियाघर की क्रूरता…. सियार को जिंदा जलाने का आरोप

नई दिल्ली

दिल्ली चिड़ियाघर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएंगी। हाल ही में नेशनल जू वर्कर्स यूनियन ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर यह आरोप लगाया है कि नवंबर माह में जू में एक सियार को जिंदा जला कर मार दिया गया और सबूत मिटा दिए गए। संघ इस मामले में जांच की मांग कर रहे है, वहीं जू प्रशासन इन आरोपो को निराधार बता रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला पिछले साल 22 नवंबर, 2025 से जुड़ा है। मिली के जानकारी इस दिन चार सियार जू से कटी हुई तारों के नीचे से निकलकर भाग निकले थे। उसके कुछ ही दिनों के बाद जू प्रशासन ने जानकारी दी कि सभी सियार वापस जू में लौट आए हैं।

असल माजरा तब शुरू होता है जब दिसंबर मे उनमें से एक सियार अपने बाड़े से कूदकर काले भालू के बाड़े में घुस जाता है। यूनियन का आरोप है कि जू प्रशासन सियार के इस कृत्य से नाराज़ हो जाते हैं और उसे इस गलती की ऐसी दर्दनाक सजा देते हैं, जिसे सुनकर किसी की रूह कांप उठेगी।

आरोप है कि सियार को भालू के बाड़े में बंद कर दिया जाता है, जिसके बाद बाड़े में नमक मिर्च डालकर आग लगा दी जाती है जिसमे सियार तड़प तड़प कर मर जाता है। आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि दो दिन बाद बाड़े को खोला जाता है और उसके शरीर के अवशेषों को दिहाड़ी मजदूरो की मदद लेकर कहीं फेंक दिया गया।

जू प्रशासन ने आरोपो को बताया निराधार

संघ द्वारा लगाए गए इन आरोपो को जू प्रशासन ने निराधार बताया है और अपनी सफाई देते हुए कहा है कि आरोप सरासर ग़लत है। जू में ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई है। इस वक्त चिड़ियाघर में उतने ही सियार मौजूद हैं जितने की रिकार्ड में मौजूद हैं। जिस सियार की मौत का आरोप लगाया जा रहा है वह फिलहाल जू में मौजूद हैं।

यूनियन ने जांच की की है मांग

नेशनल जू वर्कर्स यूनियन ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इस मामले में जांच की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने मंत्रालय को नवंबर और दिसंबर माह की सीसीटीवी फुटेज को सामने लाने की भी मांग की है। हालांकि अभीतक इस मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस मामले में आगे की कार्रवाई मंत्रालय के निर्णय के बाद ही लिया जाएगा।

Author Profile

MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top