भारत
हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में आयोजित आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) वर्ल्ड कंजर्वेशन कांग्रेस 2025 में भारत सरकार ने अपनी जैव विविधता की सुरक्षा के लिए ‘नेशनल रेड लिस्ट रोडमैप’ और ‘विज़न 2025-2030’ को लॉन्च किया। यह रोडमैप भारत की विलुप्त हो रही वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के प्रयासों को एक नई दिशा देगा। इस कदम को भारत की समृद्ध जैव विविधता को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
क्या है IUCN लाल सूची और इसका महत्व
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा जारी की जाने वाली रेड लिस्ट दुनिया भर में प्रजातियों के विलुप्त होने वाले जानवरों, पौधों और कवक की प्रजातियों का आकलन करती हैं। यह सूची हमें बताती है कि कौन-सी प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं और उन्हें तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। IUCN रेड लिस्ट में प्रजातियों को नौ श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें ‘विलुप्त’, ‘जंगली में विलुप्त’, ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’, ‘संकटग्रस्त’ और ‘असुरक्षित’ जैसी श्रेणियां शामिल हैं। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर, लगभग 28% प्रजातियां विलुप्ति होने के खतरे में हैं।
क्या है भारत का राष्ट्रीय ‘रेड लिस्ट रोडमैप और विजन 2025-2030’
भारत द्वारा लॉन्च किया गया यह पहल ‘राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप 2025-2030’, देश की जैव विविधता के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इस पहल को भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) ने IUCN-भारत और सेंटर फॉर स्पीशीज सर्वाइवल के सहयोग से तैयार किया। इसका उद्देश्य देश के भीतर मौजूद पौधों और जानवरों की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना और उनके संरक्षण के लिए एक ठोस रणनीति बनाना है।इस रोडमैप के तहत भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी पहली ‘नेशनल रेड डेटा बुक’ प्रकाशित करना है। यह पुस्तक देश की प्रमुख वनस्पतियों और जीवों की संरक्षण स्थिति को विस्तार से दर्ज करेगी।
रोडमैप के प्रमुख लक्ष्य
●सटीक वैज्ञानिक आकलन: देश में मौजूद वनस्पतियों, जीवों, पक्षियों, सरीसृपों और समुद्री जीवों सहित सभी प्रमुख प्रजातियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा।
●राष्ट्रीय रेड डेटा बुक: इस पहल के तहत 2030 तक भारत की पहली ‘राष्ट्रीय रेड डेटा बुक’ तैयार की जाएगी। यह किताब देश की जैव विविधता के स्वास्थ्य का एक विस्तृत दस्तावेजीकरण होगी।
●संरक्षण रणनीति: आकलन के परिणामों के आधार पर, संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान की जाएगी और उनके संरक्षण के लिए लक्षित रणनीति बनाई जाएगी।
●नीति-आधारित ढांचा: यह रोडमैप एक मजबूत नीति-आधारित ढांचा प्रदान करेगा जो संरक्षण प्रयासों को प्रभावी ढंग से निर्देशित करेगा।
क्यों है यह भारत मे महत्वपूर्ण
भारत दुनिया के 17 मेगा-बायोडायवर्स देशों में से एक है और यहां चार वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट स्थित हैं। यहां 104,000 से अधिक प्राणी और 18,000 से अधिक पुष्पीय पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यह रोडमैप न केवल भारत की अपनी समृद्ध जैव विविधता को बचाने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों में भी योगदान देगा।
भारत द्वारा राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप का शुभारंभ एक दूरदर्शी कदम है। यह दिखाता है कि भारत प्रकृति के संरक्षण के प्रति कितना गंभीर है। यह पहल हमें हमारी जैव विविधता के वर्तमान स्वास्थ्य को समझने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखने में मदद करेगी। अब यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि यह रोडमैप प्रभावी ढंग से लागू हो, ताकि भारत की अनूठी और अद्भुत प्रजातियां विलुप्ति के खतरे से बच सकें।
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