पलामू टाइगर रिज़र्व: वन्यजीवों और वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए तैनात किए जाएंगे सशस्त्र सुरक्षा बल

रांची (झारखंड)

पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षण उद्यान हैं, नक्सली क्षेत्र में मौजूद होने की वजह से, अक्सर वहां नक्सलवादी घटनाएं होती रहती हैं। बढ़ते हुए अवैध शिकार, वन्यजीवों की तस्करी और लकड़ी माफियाओं से आजिज होकर वन विभाग काफी समय से राज्य सरकार से अभयारण्य मे एक सशस्त्र सुरक्षा बल की तैनाती की मांग कर रहा था, जिसपर अब मोहर लग चुकी हैं और जल्द ही वन्यजीवों और वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बल की तैनाती का कार्य पूरा किया जाएगा। यह फैसला क्षेत्र में नक्सलियों और शिकारियों से बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है।

नक्सलवादी क्षेत्र के अंदर आता हैं पीटीआर, अक्सर होती रहती हैं नक्सलवादी घटनाएं

पलामू टाइगर रिजर्व नक्सलवादी क्षेत्र के अंदर आता हैं, और कई सालों से कुख्यात माओवादी नक्सलवाद से जूझता आ रहा हैं। फिलहाल, पलामू टाइगर रिजर्व में करीब 110 फॉरेस्ट गार्ड और 300 ट्रैकर तैनात हैं, जो लाठी और टांगी के सहारे ही वन्यजीवों की सुरक्षा करते हैं, जिससे वे सशस्त्र खतरों का सामना करने में असमर्थ थे।

पर्याप्त संसाधन न होने के बावजूद भी वनकर्मी शिकारियों और नक्सलियों से लोहा लेते हैं, और कभी-कभी तो इस मुठभेड में उनकी जान भी चली जाती हैं। इसी समस्या को देखते हुए इस योजना की तत्काल जरूरत महसूस हो रही थी।

बढ़ेगा वन कर्मियों का मनोबल

इस फैसले से क्षेत्र मे तैनात वन सुरक्षा कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा। अभी तक वे बहुत ही सीमित संसाधनों की मदद से शिकारियों और तस्करों का मुकाबला करते आ रहे थे। सशस्त्र बल की तैनाती से न सिर्फ वन सुरक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि वे आपराधिक तत्वों से बेहतर ढंग से निपट सकेंगे, जिससे बाघों और अन्य वन्यजीवों का संरक्षण और भी बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अन्य राज्यों की माॅडल से मिली प्रेरणा

झारखंड सरकार ने पलामू टाइगर रिज़र्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र सुरक्षा बल की तैनाती की प्रेरणा असम और ओडिशा जैसे राज्यों से ली हैं, जहां सशस्त्र वन सुरक्षा बलों ने वन्यजीवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सशस्त्र बल की तैनाती के बाद अवैध शिकार में भारी कमी आई है।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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