पनियेली (केरल)
केरल के एर्नाकुलम जिले में पश्चिमी घाट के किनारे बसा पनियेली गाँव कभी अपनी हरी-भरी हरियाली और समृद्ध वन्यजीवों के लिए जाना जाता था। पर मौजूदा समय मे मानव-वन्यजीव के बढ़ते संघर्ष का एक दुखद उदाहरण बन गया है। जंगली क्षेत्र मे बसे इस गाँव मे वन्यजीवों ने इस कदर उत्पात मचाया कि लोग अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो गए। नतीजन कभी गुलजार रहने वाले इस गांव में अब वन्यजीवों का राज होता जा रहा हैं।
कभी गुलजार हुआ करता था गाँव
एक समय पर पनियेली में लगभग 250 परिवार रहते थे,लेकिन अब यह संख्या 100 से भी कम हो गई है। गांव में खाली घर और बर्बाद हो चुकी इमारतें इस बात का प्रमाण हैं कि किस तरह वह गाँव मानव-वन्यजीव संघर्ष से जूझ रहा हैं। सबसे पहले कुछ परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए गांव छोड़ना शुरू किया और जैसे-जैसे आबादी कम हुई, जंगली जानवरों का गांव में प्रवेश बढ़ गया और आज स्थित यह हैं की गाँव मे रह रहा हर शक्स वन्यजीवों के डर के साये मे हैं।
संघर्ष का मुख्य कारण
पिछले कुछ सालों से पनियेली और उसके आसपास के क्षेत्रों में इंसानों और जानवरों के बीच टकराव की घटनाएं तेजी से बढ़ी है। इसका मुख्य कारण हैं वन्यजीवों के प्राकृतिक निवास स्थान मे कमी। जंगल काटकर लोगो ने अपना घर और कृषि भूमि बना लिया, जिससे वन्यजीवों को उनके रहने की जगह कम पड़ने लगी और इस वजह से उनका इंसानी बस्तियों में आगमन शुरु हो गया। वन्यजीवों का आतंक इस कदर बढ़ गया कि लोगों को वित्तीय नुकसान, सुरक्षा, और आजीविका की समस्या का सामना करना पड़ा। सरकार से भी कोई सहायता नही मिलने पर आखिर मे तंग आकर लोगो ने गाँव छोड़कर जाना ही मुनासिब समझा।
वन्यजीवों ने मचा रखा हैं गाँव में आतंक
जंगल के किनारे बसे होने की वजह से अक्सर हाथी, जंगली सूअर और अन्य जानवर भोजन और पानी की तलाश में मानवीय बस्तियों में घुस आते थे, जिससे जान-माल का नुकसान होता था और ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता था। हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते थे, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। वन्यजीवों के हमलों के कारण कृषि करना मुश्किल हो गया, जिससे लोगों की आय का मुख्य साधन छिन गया।

मानव-वन्यजीव संघर्ष से भविष्य की चिन्ताएं
मानव-वन्यजीव संघर्ष का केवल यह ही गाँव उदाहरण नही हैं, देश मे ऐसे कई गाँव है जो इस समस्या से जूझ रहे हैं।जैसे-जैसे पनियाला जैसे गांव खाली होते जा रहे हैं, वन्यजीवों के लिए रास्ता साफ हो रहा है। यह एक ऐसी स्थिति है जो पर्यावरण संतुलन के लिए अच्छी हो सकती है, लेकिन उन इंसानों के लिए विनाशकारी है, जिन्हें अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पड़ रहे हैं। यह एक गंभीर चुनौती है, जिसमें वन्यजीव संरक्षण और मानवीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना भी जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष शांति से सह-अस्तित्व में रह सकें।
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