सतपुड़ा से लाए गए गौरों की नई खेप से बांधवगढ़ के जंगलों में जैव विविधता को मिलेगी मजबूती
प्रशांत मेश्राम, भोपाल | मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जैव विविधता (Biodiversity) संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। यहां गौर (Indian Gaur) की पुनर्स्थापना (Translocation/Restoration) परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी गई है। इस चरण में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए 5 गौरों को बांधवगढ़ के जंगल में सुरक्षित तरीके से छोड़ा गया।

5 गौर छोड़े गए—1 नर, 4 मादा
खबर के अनुसार सतपुड़ा से लाए गए कुल पांच गौर (एक नर और चार मादा) को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कलवाह परिक्षेत्र में बने गौर बाड़े में रिलीज किया गया। यह प्रक्रिया सुबह 9:30 से 10:00 बजे के बीच पूरी की गई।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई रिलीज प्रक्रिया
गौरों को छोड़ने की पूरी प्रक्रिया क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उपसंचालक योहान कटारा की मौजूदगी में संपन्न हुई।

22 जनवरी को सतपुड़ा के चूरना क्षेत्र से पकड़े गए
इन गौरों को 22 जनवरी 2026 को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र के वन इलाके से विशेषज्ञ टीम द्वारा सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया था। अभियान का नेतृत्व सतपुड़ा की क्षेत्र संचालक राखी नंदा और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम ने किया।
इसके बाद सभी गौरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें विशेष रूप से तैयार परिवहन वाहनों से बांधवगढ़ लाया गया।

प्रोजेक्ट किसके सहयोग से चल रहा है?
यह गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और मध्यप्रदेश वन विभाग के संयुक्त सहयोग से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बांधवगढ़ में:
- गौरों की संख्या को मजबूत करना
- उनकी आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बनाए रखना
- और पूरे इकोसिस्टम को ज्यादा संतुलित व समृद्ध करना
है।
फरवरी 2025 में पहले चरण में 22 गौर लाए गए थे
खबर में बताया गया है कि इस परियोजना के पहले चरण में फरवरी 2025 के दौरान 22 गौर बांधवगढ़ में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं।
22–25 जनवरी 2026 के बीच 27 गौर लाने का प्रस्ताव
दूसरे चरण में योजना है कि 22 से 25 जनवरी 2026 के बीच कुल 27 गौर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाए जाएं। इसके लिए 9 विशेष परिवहन दल बनाए गए हैं।
इन दलों में शामिल हैं:
- उप वनमंडल अधिकारी
- वन क्षेत्रपाल
- वन्यप्राणी चिकित्सक
- वनपाल और वनरक्षक
और हर दल में लगभग 10 सदस्य तैनात किए गए हैं।
1990 के दशक में बांधवगढ़ से गौर विलुप्त हो गए थे
रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 के दशक में बांधवगढ़ क्षेत्र से गौर पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। बाद में 2010–11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर लाकर यहां पुनर्स्थापना की गई थी, जो काफी सफल रही।
बांधवगढ़ में अब 191 से ज्यादा गौर
वन विभाग के अनुसार, इस सफल संरक्षण प्रयासों के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौरों की संख्या बढ़कर अब 191 से अधिक हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल गौर संरक्षण नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करने और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
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