काजीरंगा (असम)
अपनो का साथ अपना ही होता है, फिर चाहे वो जानवर हो या इंसान। यह खबर कसम के काजीरंगा नेशनल पार्क से संबंधित है, जहां 20 जनवरी 2026 (मंगलवार) को चार साल पहले बाढ़ में बिछड़े दो गैंडों को उनके घर पहुंचाया गया। ये दोनों गैंडे अपने परिवार से बिछड़ गए थे, जिन्हें पिछले कई सालों से वन्यजीव पुनर्वास एवं संरक्षण केंद्र में रखा गया था, जिन्हें आखिरकार उनके अपनों तक पहुंचा दिया गया।
चार साल पहले बिछड़ गए थे दोनों गैंडे
इन दोनों गैंडों का नाम ‘चंद्र’ और ‘कान्हाई’ है। जिनकी कहानी बेहद पीड़ादायक है। मिली जानकारी के अनुसार ये दोनों गैंडे साल 2020 और 2021 की भीषण बाढ़ के दौरान अपनी मां और झुंड से बिछड़ गए थे। जिन्हें कुछ दिनों बाद वन विभाग द्वारा असहाय अवस्था में कोहोरा के मिहिमुख और कथोरी क्षेत्रों से बचाया गया था। इसके बाद से इन दोनो का इलाज और पालन-पोषण वन्यजीव पुनर्वास एवं संरक्षण केंद्र द्वारा किया जा रहा था।
फिर से मिला अपनो का साथ
लंबे समय से अपनो से दूर रहने के बाद करीब 4-5 सालों के बाद बीते मंगलवार को उन्हें उनके प्राकृतिक आवास (काजीरंगा नेशनल पार्क) में उनके अपनों के पास छोड़ दिया गया। इसकी तैयारी पार्क प्रशासन द्वारा काफी समय से की जा रही थी।
पार्क में पुनर्वास करने से पहले उन्हें पहले जंगल के पास बने एक ‘पूर्व-रिलीज़ बाड़े’ में रखा गया था, ताकि वे जंगल के प्राकृतिक माहौल में ढल सके। जब पार्क प्रशासन को उनके स्वभाव में सहजता दिखीं, उसके बाद उन्हें जंगल में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया।
बाढ़ से जंगल तक का सफर किया तय
बाढ़ में बिछड़े इन दोनों गैंडों ने बाढ़ से जंगल तक का सफर तय किया। अपने प्राकृतिक आवास में वापस आने के बाद उनके स्वभाव में एक अलग खुशी देखी गई। गैंडों की घर वापसी से पार्क प्रशासन में भी खुशी का माहौल है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गैंडों का घर है। पूरी दुनिया के 70% एक सींग वाले यही निवास करते हैं। काजीरंगा के लिए हर एक गैंडा अहम है।
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