बिहार
बिहार की दो आर्द्रभूमियों को भारत की रामसर साइट्स मे शामिल किया गया हैं जिसके साथ ही अब भारत मे कुल मिलाकर 93 रामसर साइट्स हो गए हैं जो कुल मिलाकर 13,60,719 हेक्टेयर की क्षेत्रफल मे मौजूद हैं। इन दो रामसर साइटों को शामिल करने के साथ ही अब भारत रामसर साइट्स की संख्या के मामले में एशिया का पहला और दुनिया में तीसरे स्थान पर आ चुका बना है जो देश के लिए एक गौरव का क्षण हैं।
बिहार के बक्सर जिले में स्थित ‘गोकुल जलाशय’ जो 448 हेक्टेयर मे फैला हुआ है और पश्चिम चंपारण जिले में ‘उदयपुर झील’ जोकि 319 हेक्टेयर मे फैला हुआ है, जिन्हे हाल ही में भारत की नई रामसर साइट्स के रूप मे शामिल किया गया हैं।
नए रामसर साइटों की विशेषताएं
●गोकुल जलाशय: गोकुल जलाशय बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि हैं, जो प्रवासी पक्षियों के लिए प्रदेश का एक प्रमुख आश्रय स्थल है। यह लगभग 27 किलोमीटर लंबा है और विभिन्न जलीय जीवों और लगभग 65 प्रजातियों के पक्षियों का घर है। इसमें हाल ही में दुर्लभ ‘इजिप्शियन वल्चर’ को भी देखा गया था।

●उदयपुर झील: उदयपुर झील बिहार के पश्चिम चंपारण जिले मे गंडक नदी के ऑक्सबो झील पर स्थित एक वन्यजीव अभयारण्य और आर्द्रभूमि है। इसे ‘सरैया मन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह अभयारण्य आर्द्रभूमि का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कई प्रकार के वन्यजीवों और वनस्पतियों का निवास स्थान है।

क्या होते हैं रामसर साइट्स और किन्हें किया जाता हैं इनमे शामिल
रामसर साइट्स वह आर्द्रभूमि या नमभूमि होती हैं, जो जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रामसर साइट्स को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व दिया जाता है और इनके संरक्षण मे सरकार भी अपना योगदान देती हैं। इनमे उन आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है जो वैश्विक जैविक विविधता के संरक्षण मे अपना योगदान देती है, तथा मानव जीवन को बनाए रखने वाले पारिस्थितिकी तंत्रों के घटकों को सुरक्षित रखने मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका मिभाती है।
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