पटना (बिहार)
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआइ) ने बुधवार को पटना के बांस घाट इलाके से दो साधु-वेशी तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से तेंदुए की खाल और संरक्षित गोह (मानिटर लिजार्ड) की हाथा-जोड़ी (प्रजनन अंग) बरामद किया गया। दोनों तस्करी हिमालय प्रदेश से बिहार इन अंगों को बेचने की फिराक से आए थे।
माना जा रहा है कि अंधविश्वास के कारण इन्हे मंगाया गया था। साथ ही तेंदुआ की खाल एवं हाथा जोड़ी को वन विभाग को सौंप दिया गया।
साधु-वेशी बनकर आए थे अंगों को बेचने
दोनो तस्कर हिमालय प्रदेश के बताए जा रहे है, जिनका नाम गुरुनाम सिंह और विक्की सिंह हैं। ये दोनो पटना के बांस घाट इलाके मे किसी धनी व्यक्ति को वन्यजीव अंगों को बेचने की फिराक मे आए थे, जो समय रहते ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस के मुताबिक अंधविश्वास में पड़कर किसी बड़े मनोवांच्छितफल की इच्छा में इसे मंगाया गया था। वन्यजीव अंगों को पुलिस ने अपने कब्जे मे लेकर वन विभाग को सौंप दिया और उनपर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्यवाही की गई है।
50 लाख में हुआ था डील डन
पकड़े गए तस्करों से हुई पूछताछ के अनुसार उनके द्वारा इससे पहले भी कई वन्यजीव अंगों की तस्करी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा चुका है। वे हिमालय प्रदेश से वन्यजीवों का शिकार करते थे, फिर उनके अंगों को वॉट्सअप की मदद से बेचा करते थे। इस काम मे कई और लोग भी उनका साथ देते थे।
इस बार भी उनके द्वारा बाघ की खाल और हाथा-जोड़ी को बिहार के बांस घाट इलाके मे बेचने का 50 लाख रुपये में डील डन हुआ था। मोबाइल के माध्यम से फोटो शेयर तथा डील डन होने के बाद ही वे पटना पहुंचे थे। बांस घाट इलाके दोनों सामानों का हैंडओवर किया जाना था, इससे पहले ही डीआरआइ की टीम ने उन्हें धर दबोचा।
अंधविश्वास के सिलसिले मे मंगाया जाता है इन वन्यजीवों का अंग
जानकार बताते है कि तेंदुए की खाल और गोह की हाथा-जोड़ी का अंधविश्वास में उपयोग होता है। इसका उपयोग तांत्रिक विद्या में वंशीकरण, धन आकर्षण, शत्रु बाधा से मुक्ति और कोर्ट-कचहरी में विजय पाने के लिए अधिक किया जाता है। हाथा-जोड़ी को देवी का प्रतिरूप भी माना जाता है। हाथा-जोड़ी वंशीकरण की शक्ति रखती है, जो आकर्षण को बढ़ाती है और लोगों को वश में रखने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।
ऐसी मान्यता है कि धन और व्यापार में वृद्धि के लिए हाथा-जोड़ी को तिजोरी में लाल कपड़े में बांधकर रखने से आय में वृद्धि होती है। इसके साथ ही इसे शत्रुओं को परास्त करने और कोर्ट-कचहरी या मुकदमों में सफलता दिलाने में भी इस्तेमाल की जाती है। इसके अतिरिक्त तांत्रिक क्रियाओं के तहत भूत-प्रेत बाधाओं को दूर करने व देवी को प्रसन्न करने के लिए लोग इसका उपयोग करते है।
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