भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में जब्त की गई 15 क्विंटल मैंग्रोव की जड़ें

केंद्रपाड़ा (ओडिशा)

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग को एक बड़ी सफलता मिली है, जहा उनके द्वारा की गई छापेमारी में 15 क्विंटल मैंग्रोव की जड़ें जब्त कीं गई हैं। वही इस मामले मे नौ लोगो की गिरफ्तारी की गई है। विभाग द्वारा यह कार्रवाई राष्ट्रीय उद्यान के कलिभंजड़िया वन बीट क्षेत्र में की गई, जहां से ये अवैध जड़ें बरामद की गई है।

नौ लोगो को किया गया गिरफ्तार

वन विभाग ने इस मामले मे नौ लोगो को गिरफ्तार किया, जिसमे पांच महिलाएं और चार पुरूष शामिल है। क्षेत्र के रेंजर और सहायक वन संरक्षक मानस दास ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी नौ लोग पार्क के आसपास के गांवों के ही निवासी हैं। इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

जब्त की गई 10 क्विंटल मैंग्रोव की जड़ें और तने

जब्त की गई जड़ों में ‘बटारा’ नामक सालासिआ प्रिनोइड्स (Salacia prinoides) की 10 क्विंटल जड़ें और तने शामिल हैं, जिन्हें 20 बोरियों में पैक किया गया था। इसके अलावा, ‘गरानी’ नामक सेरिओप्स डेकांड्रा (Ceriops decandra) की 5 क्विंटल जड़ें भी 10 बोरियों में बरामद की गईं। अधिकारियों ने गिरफ्तार किए गए लोगो के पास से मैंग्रोव के पेड़ों को काटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले औजार भी जब्त किए।

चंदन की तरह बेची जाती है मैंग्रोव की जड़ें

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आजकल तस्कर मैंग्रोव की जड़ों को चंदन की तरह बेच रहे है। बटारा की जड़ों का रंग पीला होता है, जिससे तस्कर उसमें कृत्रिम रंग और सुगंध मिलाकर उसे चंदन के रूप में महंगे दामों पर बेचते है। बटारा एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग मधुमेह और रक्त शर्करा के इलाज में किया जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत बढ़ जाती है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब भितरकनिका में मैंग्रोव की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। इससे पहले भी राष्ट्रीय उद्यान के किनारे के क्षेत्रों में अवैध झींगा फार्म बनाने के लिए मैंग्रोव को बड़े पैमाने पर साफ किया गया था। मैंग्रोव की तस्करी के मामले मे इससे पहले भी कई गिरफ्तारियां की जा चुकी है, जो चिंता का विषय है और इसपर कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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