भोपाल (मध्यप्रदेश)
झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) मे बाइसन (गौर) की घटती संख्या को देखते हुए एक अहम फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत मध्य प्रदेश से झारखंड के पलामू मे 50 बाइसनों को स्थानांतरित किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य पलामू में बाइसनों की आबादी को बढ़ाना और बाघों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराना है।
पलामू टाइगर रिजर्व में लगातार कम हो रही है बाइसनों की संख्या
बीते कुछ सालो से पलामू टाइगर रिजर्व में बाइसनों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। 1974 में जहाँ इनकी अनुमानित संख्या 1,500 थी, वहीं अक्टूबर 2025 के सर्वेक्षण के अनुसार यह घटकर केवल 68 रह गई है। हाल ही मे हुई गणना के अनुसार पलामू टाइगर रिजर्व मे मौजूदा वक्त पर 33 मादा, 25 नर और 1.5 से 4 साल की उम्र के 10 बाइसन के बच्चे शामिल है। राज्य मे इनकी तेजी से घट रही संख्या बेहद चिंतनीय है और इसपर जल्द से जल्द कोई कदम उठाने की जरूरत है।
क्या होगा इस कदम से लाभ
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पीटीआर मे उनकी आबादी को बढ़ाना है। मध्य प्रदेश से नए बाइसनों के आने से उनकी स्थानीय आबादी के जीन पूल में विविधता आएगी, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता और स्वास्थ्य में सुधार होगा।
इसके साथ इसका एक और कारण भी है। बाइसन बाघों का एक पसंदीदा शिकार होते है। पीटीआर में बाघों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। उनके लिए पर्याप्त शिकार सुनिश्चित करने के लिए भी बाइसनों का इस पीटीआर मे लाना आवश्यक है।
केन्द्र सरकार से मिला स्थानांतरण की मंजूरी
झारखंड वन विभाग ने मध्य प्रदेश से गौरों के स्थानांतरण के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी मिल गई है। जिसके तहत 50 बाइसनो का स्थानांतरण किया जाएगा। पीटीआर के अधिकारियों ने इस स्थानांतरण के लिए दो साल तक सर्वेक्षण और रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें उनकी आबादी, उनके आवास और संख्या में ठहराव के कारणों का अध्ययन किया गया। मध्य प्रदेश वन विभाग भी इस कार्य में सहयोग देगा।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश से गौरों का यह स्थानांतरण पलामू टाइगर रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल गौरों की आबादी को पुनर्जीवित करेगा बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा।
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