वायनाड मे एक मालाबार विशाल गिलहरी की हत्या के आरोप में तीन किसान गिरफ्तार, किसानों मे आक्रोश

वायनाड (केरल)

केरल के वायनाड में मंगलबार को एक मालाबार विशाल नर गिलहरी को मारने के आरोप मे 3 किसानों की गिरफ़्तारी की गई। वन विभाग का आरोप है कि आरोपित किसानों ने गिलहरी को एयर गन की मदद से मार-पीट कर उसे जान से मार डाला। वही आरोपित किसानों का कहना है कि उनके द्वारा गिलहरी को एयर गन से सिर्फ डराने की कोशिश की गई थी, जिसमे अनचाहे मे उसकी जान चली गई। तीनों की गिरफ्तारी के बाद किसान समुदाय मे आक्रोश का माहौल है।

हाल ही मे केरल सरकार द्वारा अपने बचाव मे जंगली जानवरों को जान से मारने का अधिकार दिया गया हैं। जिसकी वजह से यह मामला और भी गरमाया हुआ हैं।

तीन किसानो पर लगाया गया है आरोप

विशाल गिलहरी को जान से मारने के आरोप मे तीन किसान जेन पुलिक्कल, राजन पुलिक्कल और शिनो कुजुप्पिल को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग का कहना है कि एयर गन का इस्तेमाल केवल जानवरों को डराने के लिए मान्य है, न कि उससे उनको जान से मारने की। इसका इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब उससे किसी भी वन्यजीव के साथ कोई अप्रिय दुर्घटना न हो। अगर किसी जानवर के साथ कोई दुर्घटना होती है तो वह घटना अनजाने मे नही बल्कि जानबूझकर की गई होती है, जोकि एक अपराध है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत दर्ज किया गया है मामला

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम मे मालाबार विशाल गिलहरी (रतुफा इंडिका) को IUCN द्वारा संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जिनका शिकार या हत्या अपराध की श्रेणी मे आती हैं। इस मामले मे गिरफ्तार तीनों आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 9 के तहत मामला दर्ज किया गया हैं।

किसान समुदाय मे बढ़ा हुआ है आक्रोश

तीनो आरोपित किसानो की गिरफ्तारी के बाद किसान समुदाय मे तनाव बढ़ा हुआ है। घटना के बाद किसान संघों ने व्यापक रूप से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि उनके द्वारा एयर गन का इस्तेमाल केवल वन्यजीवों को डराने के लिए किया जाता है। पर अक्सर जानवर उनपर आक्रामक हमला कर देते है, जिनसे बचाव मे कभी-कभार अनजाने मे उनकी मौत हो जाती है जोकि अपराध नही हैं। किसान समुदाय गिरफ्तार तीनों किसानों की रिहाई की मांग कर रहे है और उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर जल्द से जल्द उनकी रिहाई नही हुई तो वे और भी व्यापक रूप से प्रदर्शन करेगे।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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