हर साल दुनिया भर में 4 दिसंबर को विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के सामने आने वाले खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस वर्ष, संयुक्त राष्ट्र ने विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस 2025 के लिए “वन्यजीव संरक्षण वित्त: लोगों और ग्रह में निवेश” थीम को चुना है।
दिवस का महत्व और उद्देश्य
यह दिवस प्राकृतिक दुनिया और उसमें रहने वाली अद्भुत प्रजातियों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है। वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो वैश्विक तापमान को संतुलित रखने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
इस दिन का उद्देश्य अवैध शिकार, वन्यजीवों के अवैध व्यापार, और आवासों के विनाश जैसे गंभीर मुद्दों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना है।
2012 में शुरू किया गया यह वार्षिक आयोजन, वन्यजीव अपराध से निपटने और लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए कार्रवाई करने हेतु प्रेरित करता है।
2025 की थीम: वित्तीय प्रतिबद्धता की आवश्यकता
वर्तमान में, 1 मिलियन से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रवाह आवश्यक है, जिसे पारंपरिक स्रोतों से पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
2025 की थीम इसी वित्तीय अंतर को पाटने और वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं के लिए नवीन, प्रभावी और टिकाऊ वित्तीय समाधान खोजने पर केंद्रित है। यह थीम न केवल सरकारों बल्कि निजी क्षेत्रों, गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्तियों को भी इस महत्वपूर्ण कार्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
वन्यजीव संरक्षण में भारत के प्रयास
भारत सरकार वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर गर्व करती है और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। देश में हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य व्यापक जागरूकता फैलाना है।
इसके अतिरिक्त, भारत ने कई प्रमुख संरक्षण पहलें शुरू की हैं, जैसे ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’, जिन्होंने इन प्रजातियों की आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में मदद की है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भारत के प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहनीय हैं। 1973 में हस्ताक्षरित ‘वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (CITES) का भारत एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता देश है।
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