कोयंबटूर (तमिलनाडु)
पिछले कई सालों से उत्पात मचा रहा हाथी ‘राधाकृष्णन’ को आखिरकार पकड़कर मुंडनथुराई टाइगर रिज़र्व के घने जंगलो मे छोड़ दिया गया। उसे 23 सितंबर को तमिलनाडु वन विभाग द्वारा नीलगिरी के ‘ओ’ घाटी से पकड़कर मुदुमलाई के हाथी शिविर के ‘क्राल’ में रखा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दस सालों में इस हाथी की वजह से 12 लोगों की मौत हो चुकी है। बीते कई सालो से उस क्षेत्र मे चल रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष और फसलो की बर्बादी की वजह से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए ‘राधाकृष्णन’ को पकड़ना बेहद जरूरी था।
कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ‘राधाकृष्णन’ को पकड़ने मे रही कामयाब
वन विभाग के लिए हाथी ‘राधाकृष्णन’ को पकड़ना कोई आम बात नही थी, बल्कि कई हफतों के एक लंबे ऑपरेशन के बाद टीम उसे पकड़ने मे कामयाब रही थी। बीते 23 सितंबर को उसे नीलगिरी के ‘ओ’ घाटी से पकड़ा गया था, जिसमें लगभग 100 वन कर्मियों ने अपनी भूमिका निभाई थी। राधाकृष्णन को पकड़ने के बाद पहले उसे बेहोश किया गया, फिर उसमे रेडियो कॉलर लगाया गया जिसके बाद उसे कुछ दिनो के लिए मुदुमलाई के हाथी शिविर के ‘क्राल’ में रखा गया।
12 लोगो की मौत का जिम्मेदार है ‘राधाकृष्णन’
पिछले एक दशक से ‘राधाकृष्णन’ नीलगिरी के ओ ‘वैली और इसके आसपास के क्षेत्रों में अपना आतंक बनाए रखा था। जिसकी वजह से उस क्षेत्र मे उसकी वजह से फसलों को भारी नुकसान पहुँच रहा था जिसके कारण किसानो को परेशानी का सामना करना पड़ता था और कई बार तो वह भोजन-पानी की तलाश मे मानव बस्तियों में घुसकर लोगों पर हमला कर देता था जिसमे अभी तक 12 लोग अपनी जान गवा चुके है। राधाकृष्णन की वजह से लगातार हो रही ऐसी घटनाओ के कारण वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए उसे पकड़ना एक बड़ी चुनौती की बात बन गई थी।
मुंडनथुराई के घने जंगल बने उसका नया ठिकाना
तमिलनाडु वन विभाग ने रविवार रात पूरी सावधानी के साथ राधाकृष्णन को मुंडनथुराई टाइगर रिज़र्व के घने जंगलो मे छोड़ दिया। अबसे ये घने जंगल ही उसका नया घर है। जहा का अनूकुल वातावरण उसके शारिरिक और मानसिक विकास के लिए फायदेमंद रहेगा।
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