750 किमी का सफर तय कर अंजनेरी पहाड़ियों तक पहुंचा ‘जे-132’
प्रशांत मेश्राम, भोपाल l
पेंच बाघ अभयारण्य से छोड़ा गया लंबी चोंच वाला गिद्ध ‘जे-132’ संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता के रूप में सामने आया है। यह गिद्ध महज 17 दिनों में करीब 750 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर के पास अंजनेरी पहाड़ियों तक पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की।
यह गिद्ध महाराष्ट्र राज्य वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के संयुक्त संरक्षण कार्यक्रम के तहत 11 दिसंबर को पेंच बाघ अभयारण्य से जंगल में छोड़ा गया था। BNHS के अनुसार, सुरक्षा कारणों से इसके सटीक ठिकाने को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

BNHS के शोधकर्ताओं ने बताया कि ‘जे-132’ ने अपनी यात्रा के दौरान नागपुर, वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, वाशिम, बुलडाणा, जालना और छत्रपति संभाजी नगर जिलों से होते हुए 27 दिसंबर को नासिक क्षेत्र में प्रवेश किया।
BNHS के शोधकर्ता मनन सिंह के अनुसार, गिद्ध की दिनचर्या बेहद अनुशासित रही।
“शाम को विश्राम, सुबह भोजन और फिर अगले गंतव्य की ओर उड़ान उसकी गतिविधियों से संकेत मिलता है कि उसने यात्रा के दौरान कम से कम दो बार भरपेट भोजन किया।”
उन्होंने बताया कि 12 से 15 दिसंबर के बीच छोड़े गए अन्य गिद्धों को भी पेंच क्षेत्र में जंगली गिद्धों के साथ भोजन करते देखा गया, जो इनके प्राकृतिक अनुकूलन का सकारात्मक संकेत है।
अधिकारियों के अनुसार, सफेद पीठ वाले गिद्ध पेंच क्षेत्र के आसपास ही सीमित रहे, जबकि लंबी चोंच वाले गिद्ध दूर-दराज के इलाकों की ओर निकल पड़े। इसी समूह का एक अन्य गिद्ध गढ़चिरोली जिले के धानोरा तक पहुंच चुका है, जो गिद्धों का जाना-पहचाना प्राकृतिक आवास माना जाता है।
BNHS के निदेशक किशोर रिठे ने बताया कि सभी छोड़े गए गिद्धों पर GPS ट्रांसमीटर लगाए गए हैं, जिससे उनके प्रवास, निवास स्थलों और जीवित रहने की परिस्थितियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके।

8 महीने तक मिला विशेष प्रशिक्षण
मनन सिंह ने बताया कि ‘जे-132’ उन 14 गिद्धों के दूसरे समूह का हिस्सा है, जिन्हें हरियाणा के पिंजौर से लाकर पेंच में 8 महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस समूह में 8 सफेद पीठ वाले और 5 लंबी चोंच वाले गिद्ध शामिल थे।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद इन गिद्धों को महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव वार्डन श्रीनिवास रेड्डी और BNHS अध्यक्ष प्रवीण परदेशी की उपस्थिति में जंगल में छोड़ा गया।
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