जहा भारत सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरक्षण प्रयास किए जा रहे है, वही हाल ही मे जारी की गई जंगली हाथियों की जनगणना की रिपोर्ट से बहुत चौंकाने वाला डाटा सामने आया हैं। हाल ही मे किए गए देश की पहली डीएनए-आधारित हाथी जनगणना के नतीजों से पता चला है कि पिछले आठ वर्षों में जंगली हाथियों की आबादी में लगभग 18% की कमी आई है। इस सर्वेक्षण को 2021 मे शुरू किया गया था, जिसकी रिपोर्ट लंबे एक लंबे समय बाद 2025 मे जारी की गई। यह रिपोर्ट न केवल वन्यजीव संरक्षण पर सवाल उठाते है, बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
पहली बार डीएनए के आधार पर किया गया सर्वेक्षण
यह गणना तरीका सामान्य हाथी गणना से कुछ अलग थी। सामान्य हाथी जनगणना जोकि अनुमानों के आधार पर की जाती थी, वही इस बार की गणना मे सर्वेक्षणकर्ताओं ने हाथियों के गोबर के नमूनों से डीएनए का विश्लेषण किया, जिससे प्रत्येक हाथी की विशिष्ट पहचान की जा सकी। इस उन्नत तकनीक से हाथियों की आबादी का सटीक अनुमान लगाने में मदद मिली।
इस सर्वेक्षण से जारी रिपोर्ट हे पता चला कि भारत में 2017 में हाथियों की संख्या 27,312 थी, जो अब 2025 मे घटकर 22,446 हो गई है। जिससे यह पता चलता है कि पिछले 8 वर्षों में हाथियों की संख्या में 18 प्रतिशत की गिरावट हुई हैं।
क्या है इसके पीछे के मुख्य कारण
●आवास का नुकसान- हाथियों की घटी आबादी की एक मुख्य वजह उनके निवास स्थानों मे कमी भी हैं। शहरीकरण, कृषि विस्तार और औद्योगिक विकास के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवासों मे लगातार कमी हो रही है।
●मानव-हाथी संघर्ष- वन क्षेत्रों मे कमी की वजह से अक्सर हाथी भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों में घुस जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हे इंसानो से टकराव का सामना करना पड़ता हैं, जिसकी वजह से उन्हे मानसिक तनाव का भी सामना करने पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में मानव-हाथी संघर्ष मे 629 इंसानों की मौत हुई है, वही इसमे 340 से अधिक हाथियों की भी मौत हुई है।
●अवैध शिकार- हाथियों का अवैध शिकार हमेशा से एक गंभीर विषय रहा है। अक्सर उनके दात के लिए उनका अवैध शिकार किया जाता रहा है। हालांकि इस पर कुछ हद तक अंकुश भी लगा है।
●दुर्घटनाएं- सड़क मार्ग और ट्रेन दुर्घटनाएं भी हाथियों की घट रही संख्या का एक मुख्य वजह है। अक्सर रेल पटरियों को पार करते समय हाथियों की ट्रेन से टक्कर होने से उनकी मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
सरकारी प्रयास और चुनौतिया
भारत सरकार ने हाथियों के संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ जैसे कार्यक्रम चलाए हैं। इसके तहत कई हाथी अभयारण्य स्थापित किए गए हैं। देश में 33 से अधिक हाथी रिजर्व हैं। हाल ही में तराई हाथी रिजर्व को भी अधिसूचित किया गया है। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद, मानव-हाथी संघर्ष और आवास के नुकसान जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
भारतीय हाथियों की आबादी में 18 प्रतिशत की गिरावट एक गंभीर संकट का संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत का हिस्सा रहे इन विशाल प्राणियों को बचाने के लिए अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। यह संकट न केवल हाथियों के अस्तित्व से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी खतरा है। अगर हम अभी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हाथियों को केवल किताबों में ही देख पाएंगी।
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