नर्मदा नदी में छोड़े गए 6 मगरमच्छ, मछुआरों ने जताया विरोध

खंडवा (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 30 अक्टूबर, 2025 को खंडवा जिले की नर्मदा नदी में छह मगरमच्छों को छोड़ा गया। इस पहल का उद्देश्य नर्मदा नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और जैव विविधता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री की इस पहल को पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मगरमच्छों को मिला नया बसेरा

इन सभी छह मगरमच्छों के लिए अब से नर्मदा नदी उनका नया घर है। उन्हे भोपाल से नर्मदानगर लाया गया था, जिन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों से बचाकर रखा गया था। आज इन्हें मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नर्मदा नदी की जलवायु और धारा मगरमच्छों के लिए बेहद अनुकूल है, जिससे उनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मगरमच्छ लाखों वर्षों से नर्मदा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा रहे हैं। मगरमच्छों की वापसी से नदी का पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होगा, जिससे प्राकृतिक प्रवाह निर्बाध रूप से चलता रहेगा।

मछुआरा समुदाय ने जताया विरोध

राज्य सरकार के उठाए गए इस कदम से मछुआरा समुदाय काफी आक्रोश मे है। उन्होंने इस पर विरोध जताते हुए कहा है कि सरकार की यह पहल उनकी जान और आजीविका पर गंभीर प्रभाव डालेगी। सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

वही मछुआरा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सदाशिव भंवरिया ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मगरमच्छों को छोड़ने से इंदिरा सागर बांध क्षेत्र में हजारों मछुआरों के जीवन को खतरा हो सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि मगरमच्छों की संख्या बढ़ने से वे मछुआरों का शिकार कर सकते हैं, खासकर उन गरीब मछुआरों का जो मछली पकड़ने के लिए छोटी नावों या टायर ट्यूब का इस्तेमाल करते हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया सुरक्षा का आश्वासन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह माँ नर्मदा के वाहन को उनके घर में फिर से बसाने का एक संकल्प है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मगरमच्छों को ऐसे स्थानों पर छोड़ा गया है, जहाँ से लोगों को कोई खतरा न हो। साथ ही उनहोने नर्मदा तट को वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा भी घोषित किया, जिससे जलीय जीवन का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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