धनबाद (झारखंड)
धनबाद रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऋषिकेश-हावड़ा एक्सप्रेस के महिला कोच से 78 जीवित कछुओ को बरामद किया। ये कछुए लावारिस हालत में छह कपड़े के थैलों में छिपाकर रखे गए थे। बरामद किए गए इन कछुओं की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 7 लाख 80 हजार रुपये तक आंकी गई है।
महिला कोच से बरामद किए गए 78 कछुए
बीते शुक्रवार को आरपीएफ को एक गुप्त सूचना मिली कि दून एक्सप्रेस के एक महिला कोच में बड़ी संख्या में कछुओं की तस्करी की जा रही है। इस सूचना के आधार पर वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर एक टास्क टीम का गठन किया गया, जिसने प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के आने पर जांच शुरू की।
तलाशी के दौरान, आरपीएफ टीम को महिला कोच में सीटों के नीचे छह कपड़े के थैले संदिग्ध अवस्था में मिले। आसपास बैठी महिला यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी इन थैलों पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि तस्करों ने पुलिस कार्रवाई के डर से इन्हें छोड़ दिया था या वे उतर चुके थे।
जब आरपीएफ कर्मियों ने थैलों को खोला, तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, उनमें से 78 जीवित कछुए बरामद हुए। ये सभी कछुए ‘इंडियन फ्लैपशेल’ प्रजाति के हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है।

क्या हुई इस मामले मे कार्रवाई
आरपीएफ ने सभी बरामद कछुओं को आवश्यक औपचारिकताओं के बाद धनबाद वन प्रभाग के अधिकारियों को सौंप दिया। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये कछुए कहाँ से लाए गए थे और इन्हें कहाँ भेजा जाना था।
माना जा रहा है कि इन कछुओं को तस्करी के लिए पश्चिम बंगाल या उससे आगे पूर्वी एशियाई देशों में भेजा जा रहा था, जहाँ इनका उपयोग अवैध पेट ट्रेड, पारंपरिक दवाओं और सजावटी सामान बनाने में होता है।
इस कार्रवाई में आरपीएफ की गश्ती टीम के सदस्य, जिनमें एसआई कुंदन कुमार और एएसआई जीवलाल राम भी शामिल थे, की सक्रिय भूमिका रही। यह घटना एक बार फिर वन्यजीव तस्करी के खतरे को उजागर करती है, जिसे रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रयासरत हैं।
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