अरावली में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, 25 एकड़ भूमि कराई गई मुक्त

सोहना (हरियाणा)

हरियाणा वन विभाग ने अरावली संरक्षण अभियान को तेज करते हुए सोहना के रैसिना हिल्स इलाके में एक बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को विभाग ने लगभग 25 एकड़ वन भूमि पर किए गए अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) और सर्वोच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद की गई, जिसमें अरावली पर्वत श्रृंखला की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने पर जोर दिया गया है।

अवैध रूप से किया जा रहा था कब्जा

गुरुग्राम जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस कार्रवाई में कई बुलडोजर और अन्य मशीनरी का उपयोग किया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में ‘वन क्षेत्र’ के रूप में दर्ज है, जिस पर भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर प्लॉटिंग कर दी थी और कुछ निर्माण भी शुरू कर दिए थे। ध्वस्त किए गए निर्माणों में चारदीवारी, रिहायशी ढांचे और फार्महाउस शामिल थे। इस दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

अरावली का महत्व

अरावली पर्वतमाला दिल्ली-एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रीन बेल्ट और जल विभाजक के रूप में काम करती है। इसका संरक्षण पर्यावरणविदों और अदालतों के लिए चिंता का एक प्रमुख विषय रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी ने हरियाणा और राजस्थान सरकारों को अरावली में किसी भी तरह के अवैध निर्माण और खनन को रोकने के लिए कई बार फटकार लगाई है।

अदालतों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन भूमि पर किसी भी तरह की व्यावसायिक या रिहायशी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। नवंबर 2025 की यह कार्रवाई इन्हीं कानूनी आदेशों का सीधा परिणाम है।

आगे भी ऐसी कार्रवाई रहेगी जारी

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अरावली क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि विभाग उन सभी क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जहाँ वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं और उन्हें जल्द ही खाली कराया जाएगा। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।

यह कदम अरावली के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह दर्शाता है कि प्रशासन अब इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में फरीदाबाद और गुरुग्राम के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद है, क्योंकि 11 नवंबर 2025 को इस मामले में एक और सुनवाई होनी है।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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