महराजगंज (उत्तर प्रदेश)
महराजगंज जिले में अवैध पेड़ कटाई एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जहां वन माफिया सक्रिय रूप से इसमे शामिल हैं और वही स्थानीय निवासी वन विभाग पर उनके साथ मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। यह समस्या स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए काफी चिंतनीय है।
काफी वक्त से चल रहा है वन माफियो का काला धंधा
महराजगंज में लगातार कई सालो से हरे-भरे पेड़ों (जैसे सागौन, नीम और शीशम) को बिना किसी अनुमति के काटा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों ने दर्शाया है कि वन माफिया बेखौफ होकर उन वृक्षों को भी निशाना बना रहे हैं, जिनकी कटाई पर सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हुआ है।
यह अवैध कटान केवल इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित नहीं है। खबरें बताती हैं कि धान की कटाई का मौसम शुरू होते ही वन माफियाओं की सक्रियता और बढ़ गई है। विभिन्न ग्राम पंचायतों, जैसे पोखरनी और चितवनियां, से अवैध कटान की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

ऊंची मांग बन रही पेड़ो के लिए मुसीबत
इस अवैध कटाई के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख लकड़ी की ऊंची मांग और आर्थिक लाभ है। माफिया स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं और अक्सर रात के अंधेरे में या सुनसान इलाकों में पेड़ों को काटते हैं।
वन विभाग और प्रशासन इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वन विभाग ने अवैध कटान को रोकने के लिए कुछ पहल की हैं।
जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक रणनीति बनाई गई है, जिसके तहत कानूनी रूप से एक पेड़ काटने की अनुमति तभी दी जाती है जब मालिक 10 नए पौधे लगाने का शपथ पत्र देता है। इसके अलावा, 29 विशेष प्रजातियों के पेड़ों को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
हालांकि, इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई मामलों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
इसपर रोकथाम है जरूरी
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हरियाली तेजी से उजड़ रही है, जिसका सीधा असर स्थानीय जैव विविधता और जलवायु पर पड़ रहा है। इसके अलावा, यह अवैध गतिविधि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचाती है।
महराजगंज में पेड़ों की अवैध कटाई एक जटिल समस्या है जिसके लिए प्रभावी कार्रवाई, सख्त निगरानी और स्थानीय समुदायों के सहयोग की आवश्यकता है। प्रशासन को इस खतरे को रोकने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
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