गुजरात में ‘इंडियन स्टार कछुओं’ की अवैध तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

अहमदाबाद (गुजरात)

गुजरात में शुक्रवार को अहमदाबाद ग्रामीण विशेष अभियान समूह (SOG) और वन विभाग ने एक संयुक्त अभियान मे वन्यजीव तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई मे ‘इंडियन स्टार कछुओं’ की अवैध तस्करी में शामिल एक अंतर-राज्यीय गिरोह मे शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया , साथ ही उनके पास से मिले 10 कछुओं को बचाया गया। वन विभाग इस गिरोह मे शामिल अन्य लोगो की तलाश कर रही है।

कैसे चल रहा था रैकेट?

यह गिरोह इंस्टाग्राम एप की मदद से इन संरक्षित कछुओं की अवैध बिक्री करते थे। आरोपी ग्राहकों को कछुए बेचने के लिए इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर विज्ञापन देते थे और डिलीवरी के लिए ‘रैपिडो’ जैसी पोर्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते थे। यह एक संगठित अंतर-राज्यीय रैकेट था, जिसका मुख्य सरगना गुजरात से बाहर का बताया जा रहा है।

चार आरोपियो को किया गया गिरफ्तार

इस मामले मे वन विभाग ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह गिरोह ‘Ahmedabad_dog_lovers’ नामक इंस्टाग्राम प्रोफाइल बनाकर इस काम को अंजाम देते थे। प्रोफाइल का मुख्य हैंडलर मुकेश दिलीपभाई सोनी इस एकाउंट को हैंडल और ऑनलाइन ऑर्डर लेता था। दूसदा आरोपी शुभम सुनील नोतवानी, जो पहले भी वन्यजीव तस्करी में पकड़ा जा चुका है, वह इस रैकेट मे मध्यस्थ के रूप में काम करता था। तीसरा आरोपी यशवंत सिंह चौहान ऑर्डरों को अहमदाबाद पहुंचाता था, और वही चौथा आरोपी महेशभाई सोनवने आर्डरों को गंतव्य स्थान तक पहुंचाता था।

कैसे किया गया इस रैकेट का पर्दाफाश

वन विभाग को अवैध व्यापार के बारे में विशिष्ट सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने मामले की बारीकी से निगरानी की। अधिकारियों ने एक ‘डमी ग्राहक’ बनाकर गिरोह से संपर्क किया और इंस्टाग्राम के माध्यम से कछुए का ऑर्डर दिया। जब डिलीवरी रैपिडो जैसी सेवा के माध्यम से ‘डमी ग्राहक’ तक पहुंची, तो टीम ने कार्रवाई की और चार व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रजाति की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है, जहां इनकी कीमत ₹1 लाख तक हो सकती है, जिससे इस अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

दस कछुओं को बचाया गया

बचाए गए दस कछुओं को वन विभाग की देखरेख में रखा गया है। ‘इंडियन स्टार कछुआ’ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत एक उच्च संरक्षित प्रजाति है। इस अधिनियम के तहत, इन कछुओं को पकड़ना, रखना, बेचना या छिपाना एक गंभीर अपराध है, जिसमें सात साल तक की कैद और ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है।

क्या रहेगी आगे की जांच

वन विभाग ने जानकारी दी कि अब तक इन आरोपियो द्वारा 50 से अधिक कछुओं का अवैध व्यापार किया जा चुका है। पुलिस और वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि कछुओं का स्रोत कहाँ से था और इन्हे कहा बेचा गया था और बेचा जाने वाला था।

अधिकारियों ने उन सभी ग्राहकों की पहचान करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिन्होंने इस अवैध रैकेट के माध्यम से कछुए खरीदे थे।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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