महाराष्ट्र के हर जिले में बनेगा चिड़ियाघर

मुंबई (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने और वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंगलवार को वन मंत्री गणेश नाईक ने घोषणा किया कि महाराष्ट्र के हर जिले में एक जिला स्तरीय चिड़ियाघर स्थापित किया जाएगा।

यह कदम विदर्भ में बाघों के हमलों और पश्चिमी महाराष्ट्र में तेंदुओं के हमलों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है, जिसने राज्यभर में चिंता पैदा कर दी है।

महाराष्ट्र राज्य चिड़ियाघर प्राधिकरण का गठन

इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने और राज्य में मौजूदा व प्रस्तावित चिड़ियाघरों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए, महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में ‘महाराष्ट्र राज्य चिड़ियाघर प्राधिकरण’ के गठन को भी मंजूरी दी है। इस प्राधिकरण का उद्देश्य चिड़ियाघर प्रबंधन के सर्वोत्तम तरीकों को लागू करना और वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना है।

प्राधिकरण के गठन के लिए सरकार ने 53.67 लाख रुपये की योजना को मंजूरी दी है, जो 2025-26 के लिए निर्धारित कुल परिव्यय का हिस्सा है। यह प्राधिकरण प्रधान मुख्य वन संरक्षक के अधीन काम करेगा।

तकनीकी प्रबंधन का भी लिया जाएगा इस्तेमाल

वन मंत्री ने यह भी बताया कि वन्यजीव प्रबंधन में एआई का उपयोग करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, मौजूदा चिड़ियाघरों जैसे पुणे के राजीव गांधी प्राणी उद्यान और मुंबई के वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान में भी विकास और विस्तार कार्य जारी हैं।

सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से संरक्षण के प्रयासों को जन जागरूकता और शिक्षा के साथ जोड़ना है, जैसा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण का मिशन भी है।

हालांकि, कुछ पर्यावरणविदों ने मौजूदा जंगलों को काटकर नए चिड़ियाघर बनाने के फैसले पर चिंता जताई है, उनका तर्क है कि इससे मौजूदा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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