सीधी (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित संजय टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है, जहाँ गुरुवार देर रात बाघिन टी-60 के लगभग नौ महीनो के दो शावक मृत पाए गए। वन विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में मौत का कारण संभवतः आपसी-संघर्ष को माना है।
लगभग दो महीने के थे दोनों शावक
यह दुखद घटना संजय टाइगर रिजर्व के डुबरी रेंज के उत्तर देवा बीट क्षेत्र से सामने आई, जब हाथी गश्ती दल ने गुरुवार की सुबह शावकों के शवों को देखा। तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। शावकों के शवों पर चोट के निशान पाए गए, जिससे आपसी संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार उनकी मौत बुधवार और गुरुवार की मध्यरात्रि के दौरान हुई होगी।
जांच और कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार तत्काल प्रारंभिक जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वायड की मदद से भी तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिला। तीन पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत शावकों का पोस्टमार्टम किया, और मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए शव को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा जा रहा है।
आपसी-संघर्ष की संभावना
उप वनमंडलाधिकारी सुधीर मिश्रा ने बताया कि क्षेत्र में एक नए नर बाघ की मौजूदगी की खबरें थीं। बाघों में प्रादेशिक संघर्ष एक सामान्य व्यवहार है, जिसमें एक वयस्क नर बाघ अक्सर दूसरी बाघिन के शावकों को मार देता है ताकि वह फिर से प्रजनन के लिए उपलब्ध हो सके। वन विभाग ने इस सिद्धांत की पुष्टि या खंडन के लिए जंगल में ट्रैप कैमरे लगाए हैं, जिससे संघर्ष में शामिल दूसरे बाघ की पहचान की जा सके और उसकी वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके।
मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा पर चिंता
मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बाघों की मौत के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय हैं। हाल ही में, कान्हा टाइगर रिजर्व में भी इसी तरह की घटनाओं में बाघों की मौत हुई थी। वन विभाग बाघों के संरक्षण के लिए नियमित निगरानी और शिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन ऐसी घटनाएं सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े करती हैं।
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