चंपारण (बिहार)
साल के पहले ही दिन बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटकों का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने नया रिकॉर्ड बना दिया। आंकड़ों के अनुसार नए साल के अवसर पर वीटीआर में 70 हजार से अधिक पर्यटकों की उपस्थिति दर्ज की गई, जोकि अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी मौजूद रहे। पर्यटकों के इस उमड़े सैलाब की कल्पना पहले से ही पार्क प्रशासन ने लगा लिया था, जिसको देखते हुए उचित व्यवस्था और सुरक्षा के खासे इंतजार किए गए थे।
5 जनवरी तक सभी बुकिंग है फुल
नए साल के मौके पर वीटीआर पर्यटकों के लिए पर्यटन का केंद्र बना रहा। यही वजह है कि यहां के गेस्ट हाउस, सफारी, जंगल कैंप और होटल 5 जनवरी तक पूरी तरह से बुक हो चुके हैं। आए पर्यटकों में सबसे अधिक लोग बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के मौजूद रहे। विदेशी पर्यटकों में भी वीटीआर को लेकर काफी हद तक उत्साह देखा गया। पर्यटकों की सबसे ज्यादा उपस्थिती वाल्मीकि नगर के ‘जंगल कैंप’ और ‘इको पार्क’ में देखी गई।
वन्यजीवो का दीदार कर मनाया नया साल
वीटीआर में आए पर्यटकों ने अपने नए साल की शुरुआत वन्यजीवो का दीदार के साथ किया। पर्यटक ‘जंगल सफारी’ को लेकर काफी उत्साहित रहे। सुबह से जंगल सफारी के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी रही। सफारी की सवारी कर पर्यटकों ने वन्यजीवो का बेहद करीब से दीदार किया और अपने नए साल को यादगार बनाया। यही नहीं पर्यटकों ने गंडक नदी की लहरों के बीच क्रूज और नाव की सवारी का आनंद लेकर अपने दिन को यादगार बनाया।
पार्क प्रशासन पहले से ही था तैयार
आनलाइन बुकिंग को देखते हुए पार्क प्रशासन ने पहले ही पर्यटकों के इस सैलाब का अंदाजा लगा लिया था। जिसको मद्देनजर रखते हुए सभी तरह की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम किए जा चुके थे, जिससे पर्यटकों को दिक्कत का सामना न करना पड़े। पार्क प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था पर्यटकों को भी काफी भाई, जिसका अंदाजा पर्यटकों की रिकार्ड तोड़ भीड़ को देखकर किया जा सकता है।
बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है वीटीआर
वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व, बिहार के चंपारण जिले में गंडक नदी के तट पर स्थित है। यह बिहार का एकमात्र बाघ अभयारण्य है। यहाँ बाघ के साथ-साथ हाथी, तेंदुआ, गौर, हिरण, और सैकड़ों पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पर्यटक यहाँ पर जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, नेचर ट्रेल, और कैम्पिंग का आनंद लेने के लिए आते हैं।
पिछले कुछ सालों से यह पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है, जिसका अंदाजा यहां आ रहे पर्यटकों की रिकार्ड तोड़ संख्या को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। प्रकृति की गोद में बसा यह वन्यजीव अभयारण्य ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दे रहा है।
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