(विषय: आर्द्रभूमि और मानव कल्याण)
लोकतक झील के पारिस्थितिक क्षरण और संरक्षण पर संदेश
डॉ. राजकुमार रंजन सिंह
लोकतक झील, जो उत्तर–पूर्व भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील और अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण नदी–झील (फ्लूवियल-लैकस्ट्राइन) पारिस्थितिकी तंत्र है। इसका स्वास्थ्य उन हजारों लोगों के कल्याण से सीधे जुड़ा है, जिनकी आजीविका इस झील पर निर्भर है। इस विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर हम इस अद्वितीय आर्द्रभूमि के सामने खड़ी गंभीर पारिस्थितिक चुनौतियों और इसके पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

चुनौती: दबाव में नदी–झील प्रणाली
लोकतक झील की विशिष्ट पहचान—जहाँ नदी और झील की प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं—पिछले कुछ दशकों में गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। वर्ष 1983 में जलविद्युत उत्पादन के उद्देश्य से बनाए गए इथाई बैराज ने झील के प्राकृतिक जल चक्र को बाधित कर दिया। मौसमी जल स्तर में उतार-चढ़ाव के समाप्त होने से पारिस्थितिक क्षरण की एक श्रृंखला शुरू हुई—फुमदियों (तैरती हुई वनस्पति/जैव-द्रव्य) का अत्यधिक विस्तार, झील में तलछट का बढ़ना, घुलित ऑक्सीजन की कमी के कारण जल गुणवत्ता में गिरावट, तथा खुले जल क्षेत्र का लगातार सिकुड़ना।
इन परिवर्तनों ने विश्व के एकमात्र तैरते राष्ट्रीय उद्यान कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जो संकटग्रस्त संगई हिरण का आवास है। साथ ही, इससे मछुआरा समुदायों की आजीविका और मणिपुर घाटी में बाढ़ नियंत्रण की झील की प्राकृतिक भूमिका भी खतरे में पड़ गई है।
प्रबंधन की पहल: प्रकृति के प्रवाह के साथ कार्य
झील की नदी–झील प्रकृति और उसके पारिस्थितिक स्वास्थ्य के गहरे संबंध को समझते हुए, प्रबंधन प्रयास प्राकृतिक जल प्रक्रियाओं को पुनर्स्थापित करने पर केंद्रित हैं। लोकतक विकास प्राधिकरण ने स्थानीय समुदायों और संरक्षण संगठनों के सहयोग से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—मौसमी जल स्तर को प्रोत्साहित करने के लिए नियंत्रित जल प्रबंधन, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फुमदियों की योजनाबद्ध कटाई (साथ ही पारिस्थितिक रूप से आवश्यक तैरते द्वीपों का संरक्षण), तलछट को कम करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र का पुनर्स्थापन, मछुआरों को आर्द्रभूमि संरक्षक के रूप में शामिल करते हुए सामुदायिक निगरानी कार्यक्रम, और संरक्षण व सतत आजीविका के बीच संतुलन बनाने वाली योजनाएँ।
ये प्रयास इस सच्चाई को स्वीकार करते हैं कि लोकतक झील का स्वास्थ्य नदी प्रवाह और झील प्रक्रियाओं के उस गतिशील संतुलन पर निर्भर है, जिसने इस पारिस्थितिकी तंत्र को सहस्राब्दियों तक जीवित रखा है।
कार्रवाई का आह्वान
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर लोकतक झील हमें यह याद दिलाती है कि आर्द्रभूमि संरक्षण तभी संभव है जब हम उन प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझें और उनका सम्मान करें जो इन पारिस्थितिक तंत्रों को जीवंत रखती हैं। आगे का मार्ग झील की जलगतिकी पर निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान, पुनर्स्थापन और निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधन, निर्णय-निर्माण में स्थानीय समुदायों की सार्थक भागीदारी, और ऐसे नीतिगत ढाँचे की मांग करता है जो विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक अखंडता को भी प्राथमिकता दें।
लोकतक झील केवल एक आर्द्रभूमि नहीं है—यह मानव कल्याण और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के बीच गहरे संबंध का जीवंत प्रमाण है। इसका पुनर्जीवन न केवल एक पारिस्थितिक आवश्यकता है, बल्कि उन समुदायों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी है जिनका जीवन इसकी जलधारा से जुड़ा है।
आइए, वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल आर्द्रभूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन हेतु अपने संकल्प को पुनः मजबूत करें।
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