रायपुर(छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुनी हो गई है। साल 2022 मे जो आंकडे 17 थे, वे अब 2025 मे बढ़ कर 35 हो गए है। यह महत्वपूर्ण जानकारी वन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता मे आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड की 15वीं बैठक में पेश की गई। मुख्यमंत्री ने इसपर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि ‘छत्तीसगढ़ की वन संपदा और वन्यजीव हमारी धरोहर हैं और इन्हें सुरक्षित और संवर्धित करना हमारी प्राथमिकता है।’
●अचानकमार टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक है बाघ
राज्य मे चार टाइगर रिजर्व हैं – इंद्रावती टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, अचानकमार टाइगर रिजर्व और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व। इन चारो टाइगर रिजर्व में बाघों के कुनबे बढ़ रहे हैं। राज्य में सबसे ज़्यादा बाघ(18) अचानकमार टाइगर रिजर्व(मुंगेली) में हैं।
●बाघों के साथ-साथ अन्य जानवरों की भी हो रही है वृद्धि
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे ने बताया कि प्रदेश मे बाघों के साथ-साथ अन्य जानवरो की संख्या भी बढ़ी है। असम से लाए गए जंगली भैंसों की संख्या मे भी वृद्धि पायी गई है। ‘पहाड़ी मैना’ जो छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी है उसके संरक्षण के लिए “मैना मित्र” समूह के माध्यम से विशेष पहल की जा रही है जोकि सफल भी हो रही है।
●मुख्यमंत्री बोले वन्यजीवों का संरक्षण हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ वन संपदा और वन्यजीवों से समृद्ध है। राज्य में बाघों की संख्या में वृद्धि साबित करती है कि हमारी वन्यजीवों के संरक्षण मे उठाए गए कदम कारगर साबित हो रहे है,और अब इसी तरह अन्य वन्य प्रजातियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। नीमगांव से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी आते है, जिनके संरक्षण और सुरक्षा के भी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे है। बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया जिसमे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(एनटीसीए) ने मध्य प्रदेश से बाघों को छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी गई है।
●पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य में बाघों की संख्या के साथ-साथ अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और संख्या में भी वृद्धि हुई है तथा उनके सुरक्षा का प्रयास भी किया जा रहा है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टाइगर रिजर्व और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे आस-पास के ग्रामीणों के लिए आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे और संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
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