चामराजनगर(कर्नाटक)
चामराजनगर जिले के गुंडलुपेट से एक विचित्र घटना सामने आई। जब बाघ और तेंदुए के आतंक से तंग आकर गुस्साए किसानों ने 10 से ज्यादा वन विभाग के अधिकारियों को जानवर पकड़ने वाले पिंजरे में बंद कर दिया। उनका आरोप यह है कि बार-बार शिकायत करने पर भी वन विभाग की टीम जानवरों को पकड़ने मे लापरवाही कर रही थी। किसानों के गुस्से के कारण शुरू हुआ मामला अब विवाद में बदल गया है, वही वन विभाग ने पाँच किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवायी है।
वन्यजीवों के हमले और आतंक से परेशान थे किसान
जंगल के किनारे रहने वाले किसानों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से बांदीपुर टाइगर रिजर्व की सीमा से बाघ और तेंदुए गाँव मे आकर उनके मवेशियों का शिकार करते थे, जिससे उनकी आजीविका नष्ट हो रही थी। उनके उत्पात के कारण उनकी फसलें भी नष्ट होती थी। उनकी बार-बार शिकायतों के बावजूद वन विभाग की टीम बाघों और तेंदुओं को पकड़ने में नाकाम रही। खेतों में केवल जाल लगाकर उन्हें पकड़ने का काम किया जा रहा था लेकिन इससे कोई खास नतीजा नहीं निकल रहा था।
जिस पिजड़े को लगाया था जानवरों के लिए, उसी मे पकड़कर बंद किया
वन विभाग की लापरवाही और नाकाम कोशिशों से हताश किसानों ने वन विभाग के अधिकारियों को आधे घंटे तक उसी पिजड़े मे बंद कर दिया जो विभाग द्वारा जंगली जानवरो को पकड़ने के लिए लगाया गया था। दरअसल मंगलवार की सुबह जब बाघ खेतों की तरफ देखा गया, तो ग्रामीणों ने वन विभाग को सुचित किया। लेकिन अधिकारी समय पर नही पहुचे जिससे गांव वाले नाराज हो गए। बाद मे जब अधिकारी घटनास्थल पर पहुचे तो गुस्साए ग्रामीणों ने जबरन उन्हे पिजड़े मे बंद कर दिया और तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे।
विभाग द्वारा पाँच के खिलाफ एफआईआर दर्ज
घटना के बाद बांदीपुर के मुख्य वन संरक्षक ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप गुंडलुपेट पुलिस स्टेशन में पाँच किसानों के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने, जान से मारने की धमकी देने और बाघ को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे में वन विभाग के कर्मियों को बंद करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस घटना से विभाग के कर्मचारियों का मनोबल टूट गया है और वे डर के साये में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। साथ ही, आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
एफआईआर से नाराज है किसान समुदाय
वन विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से किसान समुदाय और भी नाराज़ हो गए। आक्रोशित किसानों ने मुक़दमे को वापस लेने की माँग की है और चेतावनी दी है कि अगर एफ़आईआर तुरंत रद्द नहीं किया गया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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