भारत
भारत की भूमि का 2.57% हिस्सा बाघ अभयारण्यों के अंदर आते हैं, जोकि भारतीय वनों और नदियों की जीवनरेखा मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश मे अभी तक कुल 58 बाघ अभयारण्य हैं। 18 राज्यों और 5 परिदृश्यों तक फैले ये अभयारण्य सिर्फ़ बाघ ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। कुल 600 से अधिक छोटी-बड़ी नदियां इन बाघ अभयारण्यों से निकलती है या उनके बीच से बहती है।
बाघों के साथ-साथ अन्य वन्यजीवों का भी होता है संरक्षण
इन अभयारण्यों मे बाघों के साथ-साथ हाथियों, गैंडों और अन्य वन्यजीवों का भी संरक्षण किया जाता है। जिसकी मदद से सभी वन्यजीव मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। इसके साथ ही ये अभयारण्य नदियों और जलस्रोतों की जीवनरेखा का कार्य करने मे अहम भूमिका निभाते है।

जनजीवन के संरक्षण मे निभाते है अहम भूमिका
अभयारण्य नदियों की रक्षा करते हुए भू-जल को पुनर्भरित करने मे मदद करते है और पानी को स्वच्छ बनाते हैं और साथ ही साथ मिट्टी का संरक्षण भी करते हैं। वे दुर्लभ प्रजातियों को बचाते हुए करोड़ों लोगों के जीवन को सहारा देते हैं। उनसे बहने वाली नदियां डाल्फिन और घड़ियाल जैसी प्रजातियो के घर होते हैं।
वनों के पेड़ बड़ी संख्या मे कार्बन को संचित करते है तथा नदियों मे जल प्रवाह का नियमन करते हुए मैदानी इलाकों मे आने वाली बाढ़ की तीव्रता को कम करते है। साथ ही पहाड़ी इलाकों मे भूस्खलन के खतरे को भी कम करते है। समुद्री तट के इलाकों को चक्रवात और समुन्दरी लहरों से सुरक्षा देते है और लोगो को जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली मौसमी घटनाओं के प्रभाव से बचाते हैं।

बाघ अभयारण्य निभाते है जैव विविधता को बढ़ाने मे महत्वपूर्ण योगदान
बाघ अभयारण्य बाघों के साथ-साथ वनों के स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण योगदान निभाते हैं। वन क्षेत्र में कमी, अवैध वनों की कटाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियाँ इन अभयारण्यों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। इसे सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है जिससे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक निवास स्थान बने रहें।
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