‘प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’
भोपाल : पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ते चीतों के परिवार के साथ मध्यप्रदेश एशिया का गौरव बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 3 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश को चीता परियोजना की सौगात मिली थी। प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितम्बर 2022 को अपने जन्म दिवस पर पहले पालपुर कूनो में चीते छोड़कर प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। आज चीतों के परिवारों में वृद्धिप हो रही है। ‘प्रोजेक्ट चीता को ‘इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार हाल ही में नई दिल्ली में आईएफएस एसोसिएशन और इंडियन मास्टरमाइंड्स द्वारा आयोजित तीसरे इको वॉरियर अवॉर्ड्स कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अवॉर्ड मिलने पर चीता परियोजना से जुड़ी प्रबंधन टीम को बधाई दी है।
तीन वर्षों की साहसिक पहल
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाकर हुई। इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया। कई शंकाएँ भी उठीं कि भारतीय वातावरण चीता के लिए उपयुक्त नहीं है। इस अवधारणा को तोड़ते हुए कूनो पालपुर और गांधी सागर अभयारण में चीते फर्राटे भर रहे है और उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
चीतो को भायी म.प्र. की आवोहवा
चीता ने भारतीय वातावरण को आश्चर्यजनक रूप से तेज़ी से अपना लिया है। पिछले तीन वर्षों में पाँच चीता मादाओं द्वारा 6 बार शावकों को जन्म देना इस परियोजना की सफलता और लचीलापन का परिचायक है। वे भारतीय शिकार जैसे चीतल के प्रति अच्छी अनुकूलता दिखा रहे हैं। शुरुआत में डर था कि तेंदुओं से संघर्ष होगा, लेकिन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र ने खुद को संतुलित किया, और शिकारी प्रजातियाँ अपने-अपने क्षेत्र में सीमित हो गईं।
नवाचार, संकल्प और आशा का प्रतीक प्रोजेक्ट चीताप्रोजेक्ट चीता की तीन वर्ष की यात्रा चुनौतीपूर्ण होने के साथ प्रेरणादायक भी रही है। यह परियोजना अब और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में चीता परियोजना प्रबंधन टीम ने कभी हार नहीं मानने का पाठ सीखा।
चीता प्रबंधन के हर पहलू से ऐसी मूल्यवान जानकारियाँ मिलीं हैं, जिससे अनुभव रखने वाले और नए दोनों पेशेवरों की समझ में वृद्धि हुई है। किसी जीवित प्राणी के साथ काम करते समय जोखिम अनिवार्य होते हैं। पिछले तीन वर्षों में केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, फील्ड मैनेजर्स, पशु चिकित्सकों और फ्रंटलाइन स्टाफ का आत्मविश्वास मज़बूत हुआ। इन वर्षों में यह भी साबित हो गया कि मध्यप्रदेश आपात स्थितियों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है। प्रोजेक्ट चीता की सफलता टीमवर्क का प्रतीक है जहाँ सभी पेशेवर एक ही उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता और कौशल के साथ कार्य कर रहे हैं।

तीन वर्षों की सीख और सफलता
प्रोजेक्ट चीता की टीम के अथक प्रयासों के परिणाम सामने हैं। चीते न केवल जीवित रहे बल्कि सफलतापूर्वक अपना परिवार भी बढ़ाया। उनकी उपस्थिति ने घास के मैदानों और खुले जंगलों की ओर फिर से ध्यान आकर्षित किया। ऐसे परिस्थितिकी तंत्र पहले उपेक्षित थे। कूनो में घास के मैदानों में सुधार, जैव विविधता में वृद्धि और स्थानीय समुदायों को पर्यटन के माध्यम से लाभ पहुँचना इस चीता परियोजना की बड़ी उपलब्धियाँ हैं। चीतों की पुन:र्स्थापना से पारिस्थितिकी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हर चीते की बारीकी से निगरानी, पेशेवर पशु चिकित्सकों द्वारा देखभाल, और सुरक्षित वातावरण ने चीता परियोजना को वैश्विक मानकों के बराबर खड़ा कर दिया है।
चीता की लगातार बढ़ती संख्या
चीता परियोजना की सबसे उत्साहजनक उपलब्धि रही है कि भारत में शावकों का जन्म हुआ। वर्तमान में 25 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हैं। दो नर गांधी सागर सेंचुरी में सफलतापूर्वक पुनर्वासित हो चुके हैं। इस प्रकार कुल 27 चीते है। कूनो के परिदृश्य में एक आत्मनिर्भर और मुक्त विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करना निकट भविष्य का लक्ष्य है।तीन वर्षों की सफलता के साथ प्रोजेक्ट चीता का यह संदेश है कि यह केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रकृति संरक्षण में भारत के समर्पिेत नेतृत्व का प्रतीक है। चीता की वापसी यह सिद्ध करती है कि विलुप्ति अंतिम नहीं होती और दूरदृष्टि तथा संकल्प के साथ खोई विरासत को वापस लाया जा सकता है।
Author Profile

Latest entries
UncategorizedFebruary 3, 2026अंतरराष्ट्रीय मानव बंधुता दिवस और हमारा पर्यावरण
UncategorizedFebruary 3, 2026International Day of Human Fraternity and our Environment
UncategorizedFebruary 3, 2026विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 एवं मणिपुर की लोकतक झील
UncategorizedFebruary 2, 2026WORLD WETLANDS DAY 2026 AND THE LOKTAK LAKE OF MANIPUR
