इरोइसेम्बा मे मनाया गया ‘मणिपुर प्राणी उद्यान’ का 48वाँ स्थापना दिवस

एम.बी. लुवांग (मणिपुर)

आज इरोइसेम्बा मे, मणिपुर वन विभाग द्वारा ‘मणिपुर प्राणी उद्यान’ का 48वाँ स्थापना दिवस सह 71वाँ वन्यजीव उत्सव सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लोंगजाम जॉयकुमार की अध्यक्षता मे आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि IAF अनुराग बाजपेयी रहे; साथ ही लैशराम बिरमंगोल, बिक्रम सुरेश नाधे, थोकचोम अंतुम और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर प्राणी उद्यान में स्थापित स्मारक शिला पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसके बाद कार्यक्रम मे मौजूद अतिथियों द्वारा 71वें वन्यजीव सप्ताह, 2025 समारोह का शुभारंभ किया गया। साथ ही मणिपुर प्राणि उद्यान के कर्मचारियों और 28 सितंबर 2025 को स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को पुरस्कार वितरित किए गए।

जैव विविधता के के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है मणिपुर- IAF अनुराग बाजपेयी

इस अवसर पर आईएफएस अनुराज बाजपेयी ने कहा, कि मणिपुर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है, जो जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है और इसके अलावा यह ट्रांस-एशियाई राजमार्ग से भी गुजरता है। पिछले दो-तीन महीनों में हमने चंदेल, तेंगनौपाल, तामेंगलोंग, कामजोंग से विदेशी हेमलयन बीयर के बच्चों को बचाया है। सबसे दुखद बात यह है कि हमें मूल बीयर नहीं मिल पाई जिसकी वजह से हम बहुत चिंतित हैं। हमें संदेह है कि वह गलत हाथों में चला गया होगा। इसके अलावा, मणिपुर एक ऐसा राज्य है जो ट्रांस-एशियाई राजमार्ग से भी गुजरता है और पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में बीयर की तस्करी के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं, जिसकी हम जाँच कर रहे हैं।

उन्होंने सभी युवा और उत्साही फोटोग्राफरों से जंगल जाकर जंगली जानवरों की तस्वीरें लेने की भी अपील भी की और कहा की विभाग उन्हें पुरस्कारों से सम्मानित करने के लिए हमेशा तैयार है। क्योंकि मणिपुर में ऐसे जंगली जानवरों का ज़्यादा रिकॉर्ड नहीं है। अंत में, उन्होंने छात्रों और राज्य के लोगों से अपील की कि अगर कोई भी व्यक्ति शिकार करते या जानवरों को छूते हुए पाया गया, तो वन विभाग से शिकायत करें और अपने समाज में जंगली जानवरों की रक्षा के लिए स्वयं अभियान चलाएँ।

बाढ़ की चुनौतियों के बावजूद भी मणिपुर प्राणी उद्यान करता है वनयजीवों की सुरक्षा और संरक्षण- लैशराम बिरमंगोल

मणिपुर प्राणी उद्यान के निदेशक लैशराम बिरमंगोल ने कहा कि मणिपुर प्राणी उद्यान को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा एक मध्यम चिड़ियाघर के रूप में वर्गीकृत किया गया है और यह कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है जो इस क्षेत्र में स्थानिक हैं। उन्होंने आगे कहा कि 48 वर्षों के बाद भी मणिपुर प्राणी उद्यान को मानसून मे आने वाली बाढ़ सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। फिर भी इन सभी चुनौतियों बावजूद मणिपुर प्राणी उद्यान के कर्मचारी चिड़ियाघर में रखे गए लुप्तप्राय जानवरों की सुरक्षा और उनकी हर संभव देखभाल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं।

वन एवं वन्यजीवों की रक्षा और संरक्षण के लिए हर साल मनाया जाता है वन्यजीव उत्सव सप्ताह- लोंगजाम जॉयकुमार

संरक्षक, वन्यजीव लोंगजाम जॉयकुमार ने कहा कि भारत के वन और वन्यजीवों की रक्षा और संरक्षण का संदेश फैलाने के लिए हर साल 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक पूरे देश में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। भारत मे 1955 मे पहली बार वन्यजीवों की सुरक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ‘वन्यजीव दिवस’ मनाया गया था, लेकिन बाद में 1957 में इसका नाम बदलकर वन्यजीव सप्ताह कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “सह-अस्तित्व के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण” का उद्देश्य वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों और इन अमूल्य संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

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MB Luwang
MB Luwang
Forest and Environmental reporter at The ForestTimes.

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