हिमाचल प्रदेश
हाल ही मे, हिमाचल प्रदेश के हिम तेंदुओं का सवेक्षण किया गया, जिसमें उनकी संख्या मे बढ़ोत्तरी पायी गई हैं। साल 2021 में जो उनकी संख्या 51 थी, वह चार सालों बढ़कर 2025 मे 83 पहुंच गई है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF) के सहयोग से मिलकर इस सवेक्षण को पूरा किया, जिसमें कैमरा ट्रैप तकनीक का उपयोग किया गया और इसमें स्थानीय समुदायों, युवाओं, विशेषकर किब्बर गांव के युवाओं और महिलाओं की अहम भूमिका रही। यह सर्वेक्षण ‘सुरक्षित हिमालय प्रोजेक्ट’ का हिस्सा है, जो भारत के लिए हिम तेंदुओं के संरक्षण का एक सफल मॉडल साबित हुआ है।
हिम तेंदुआ का संरक्षण है जरूरी
हिम तेंदुआ पैंथेरा वंश का एक बड़ा बिल्ली का बच्चा है। यह प्रजाति मुख्य रूप से मध्य और दक्षिण एशिया की पर्वत श्रृंखलाओं मे पाई जाती है। भारत में हिम तेंदुए मुख्यतः जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे बर्फीले और चट्टानी पहाड़ी इलाकों में पाए जाते हैं। ये अल्पाइन और उप-अल्पाइन क्षेत्रों में, लगभग 3,000 से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर रहते हैं। ये किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, सेचू तुआन नाला और आसारंग वन्यजीव अभयारण्य जैसे संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी पाए जाते है।
IUCN ने इन्हे लाल सूची में सूचीबद्ध किया है जो कि इसकी संकटग्रस्त की स्थित को दर्शाती है। इनकी संकटग्रस्त स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने इनके संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य उनके आवासों और आबादी का संरक्षण करना है।

हिमाचल प्रदेश मे तेजी से बढ़ी है हिम तेंदुओं की संख्या
किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश मे मौजूदा हिम तेंदुओं की संख्या 83 पाई गई है, जो साल 2021 मे 51 थी। यानि बीते चार सालो मे 32 हिम तेंदुओं की संख्या मे वृद्धि दर्ज की गई है। इस सर्वेक्षण को 26,112 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में किया गया, जिससे प्रदेश के लगभग सभी महत्वपूर्ण हिम तेंदुआ आवास क्षेत्रों में हिम तेंदुओं की उपस्थिति का पता लगाया गया।
हिमाचल प्रदेश सरकार के संरक्षण प्रयासों की सफलता को उजागर करता है यह सर्वेक्षण
हिमाचल प्रदेश मे तेजी से बढ़े हिम तेंदुओं की संख्या हिमाचल प्रदेश सरकार के संरक्षण प्रयासों की सफलता को उजागर करती है। प्रदेश का यह सर्वेक्षण न केवल तीव्र और किफायती है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी हिम तेंदुओं की आबादी पर नज़र रखने के लिए एक सफल मॉडल भी बनेगा। सर्वेक्षण मे ना सिर्फ तेंदुओं की संख्या मे तीव्र वृद्धि पाया गया है, बल्कि साथ ही पल्लस की बिल्ली (किन्नौर) और ऊनी उड़न गिलहरी (लाहौल) जैसी दो नई प्रजातियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई।
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