रोशनी, भोपाल (मध्यप्रदेश)
कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक दुखद समाचार सामने आया है, जहां 2 अक्टूबर को दो मासूम शावकों और एक नर बाघ की मौत हो गई। इस घटना ने वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों को गहरे दुख में डाल दिया है।
मृत्यु के कारण
मुण्डीदादर बीट में नर बाघ के हमले से दो शावकों की मौत हो गई, जबकि मुक्की परिक्षेत्र में बाघों की आपसी लड़ाई में एक नर बाघ की जान चली गई। वन विभाग ने तुरंत कार्यवाही करते हुए पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।

वन विभाग की प्रतिक्रिया
वन विभाग ने इस घटना पर दुख जताया है और कहा है कि वह इस मामले की जांच कर रहा है। वन विभाग का कहना है कि जंगल में बाघों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
जैव-विविधता की क्षति
जंगल का हर खोया हुआ बाघ सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि हमारी जैव-विविधता की अपूरणीय क्षति है। बाघों की मौत से न केवल जंगल का संतुलन बिगड़ता है, बल्कि इससे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रकृति से प्रार्थना
प्रकृति से यही प्रार्थना है कि कान्हा की गूंज हमेशा बाघों की दहाड़ से गूंजती रहे। हमें जंगल और उसके निवासियों की रक्षा के लिए मिलकर काम करना होगा।
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